मेजवां। शायर कैफी आजमी के पैतृक गांव मेजवां में सोमवार की शाम अली हैदर के अजाखाने से करबला में उजड़े काफिले की याद में जुलूस निकाला गया। इसमें अलम और ताबूत की जियारत कर लोगों ने फूल-माला चढ़ाकर खिराज-ए-अकीदत पेश किया। अंजुमन अब्बासिया सैदपुर ने कई स्थानों पर नौहा मातम पेश किया। मौलाना ने करबला का मसायब पेश किया तो अजादार रो पड़े। जुलूस का समापन देर शाम मस्जिद में किया गया। जुलूस के साथ अजादार गम का प्रतीक काला लिबास पहन कर चल रहे थे। वहीं, चमांवा गांव में अंजुमन फरोगे अजा की ओर से बुद्वू खां की मस्जिद से पांच अक्टूबर को लुटे हुए काफिले की याद में कारवाने गम जुलूस निकाला जाएगा। रजिउल हसन उर्फ रज्जन ने बताया कि अंजुमन फिरदोसिया बिहार, अंजुमन अब्बासिया अंबेडकरनगर, अंजमुन अकबरिया सुल्तानपुर, अंजुमन अब्बासिया गाजीपुर नौहाख्वानी करेंगी। मौलाना वसीमुहम्मद इमामे जुमा चमांवा, मौलाना कैसर अब्बास, मौलाना सैयद इरफान इलाहाबाद, मौलाना सैयद शारिब अब्बास अंबेडकरनगर, मौलाना सैयद इंतेजाम हैदर मुहम्मदाबाद, मौलाना सैयद वकार हैदर शिवली मजलिस को खिताब करेंगे।
अजादारों ने किया आग का मातम
अमिलो। मुबारकपुर नगर के मुहल्ला पुराबाग के सहन में 11वीं मुहर्रम सोमवार की शाम को अजादारों ने आग पर मातम किया। मातम में शामिल विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी किया।
कार्यक्रम के शुरु होने से पहले अंजुमन अंसारी हुसैनी कदीम के तत्वावधान में एक मजलिस आयोजित की गई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना हसन अख्तर आबदी ने कहा कि हम आग पर मातम करके यह साबित करते हैं कि गमे हुसैन अलैहिस्सलाम के मुकाबले में बड़े से बड़ा तूफान आ जाय,े चाहे आग का दरिया हो हम उस पर से नामे हुसैन लेकर बिना खौफ के गुजर जायेंगे। बस शर्त यह है कि हमारी अजादारी सच्ची हो, झूठी और दिखावटी न हो। उसके बाद अंजुमन अंसारे हुसैनी कदीम, अंसारी हुसैनी रजिस्टर्ड, मासूमिया ने अपने नौहों का नजराना पेश किया। नौजवाने अन्जुमन ने जंजीर का मातम भी किया। इस मौके पर हाजी अली इमाम, अख्तर अब्बास, परवेज आजमी, हाजी अब्दुल मुकतदीर अंसारी उर्फू पल्लू सहित भारी संख्या में लोग मौजूद थे।
मुहर्रम का जुलूस संपन्न
मेहनगर । इमाम हसन, हुसैन की याद में मेहनगर कस्बे के गौरा गांव के ताजियादार और हुसैनिया अखाड़ा के ताजियादारों ने ताजिये का जुलूस निकाला। जो यूबीआई शाखा पहुचा। वहां से दोनों ताजियादारों ने हाय हुसैन, मौला अली के नारे लगते और करतब दिखाते हुए जियारत हुसैन के चौक पहुंचे। जहां सभी ने अकीदत के साथ फातिहा पढ़ा। यहां से 11 ताजियादार अपनी-अपनी ताजिया लेकर घर चले गए। इस मौके पर हुसैनिया अखाड़ा कमेटी के कमर अहमद, शमशुलहोदा, शाहिद रजा, अली कुरैशी, मुहम्मद सेराज, रोजन अंसारी आदि लोग शामिल रहे।