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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे में आ रही बाधाओं को करें दूर

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आजमगढ़। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना के कार्यों की पैकेजवार समीक्षा यूपीडा के वरिष्ठ सलाहकार ने सोमवार को आजमगढ़ और मऊ के अधिकारियों के साथ की। समीक्षा में दोनों जिलों में परियोजना का काम प्रभावित होने की बात सामने आई। इस पर कमिश्नर जगत राज ने तत्काल अवरोध खत्म कर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए।
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समीक्षा में पाया गया कि आजमगढ़ की तहसील सदर के तहत ग्राम नीबीखुर्द में लगभग चार हेक्टेयर जमीन साल 1901 में बने 1309 फसली के बंदोबस्त में जंगल खाते में दर्ज है। वर्तमान राजस्व अभिलेखों में उक्त भूखंड काश्तकारों के नाम बतौर संक्रमणीय भूमि धर दर्ज हो गई है। इस वजह से उक्त भूखंड में बाधा आ रही है। पैकेज पांच में तहसील फूलपुर के ग्राम हमीरपुर, चकिया, सुलेमानपुर, गोखवल, फरीदपुर, खानपुरचन्दू, पारा, सजनी, काशीपुर, विड़हरमय चकखजुरा, तहसील निजामाबाद के ग्राम पश्चिम पट्टी, पूरब पट्टी, गढ़वा, बैरमपुर में, पैकेज छह में तहसील सदर के ग्राम नैपुरा, किशुनदासपुर, तहसील सगड़ी के ग्राम सियरहा में, पैकेज सात में तहसील सदर के ग्राम केरमा, असोना में लगभग 12.44 किमी सीएनजी का कार्य भूमि की अनुपलब्धता के कारण रुका है। तीनों पैकेजों में पर्याप्त संख्या में सरकारी और प्राइवेट हैंडपम्प, नलकूप, बोरिंग, भवन आदि हटाना अवशेष है। धार्मिक स्थलों को भी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना है।
वहीं मऊ के पैकेज सात के सभी 40 गांवों की समीक्षा में पाया गया कि 19 गांव में कुछ स्थलों पर सीमांकन की जरूरत है। इसके अलावा सीएनजी का कार्य बाधित है। उन्होंने बताया कि मऊ में भी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के संरेखण के तहत 10 प्राइवेट बोरिंग, 14 निजी भवन, 10 निजी हैंडपम्प हैं, जिनका मूल्यांकन कराकर हटाया जाना है। इसके अलावा पांच धार्मिक स्थल भी संरेखण में हैं जिन्हें शिफ्ट कराया जाना आवश्यक है। मंडलायुक्त ने डीएम आजमगढ़ और मऊ को निर्देश दिया है कि इन बाधाओं को जल्द से जल्द दूर करें।
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