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सपा-बसपा का रहा बोलबाला, अबकी भाजपाइयों ने भी गड़ाई नजर

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आजमगढ़। हाईकोर्ट द्वारा चुनाव आयोग को नवंबर माह तक निकाय चुनाव कराने के निर्देश देने के बाद एक बाद फिर निकायों में राजनीतिक सरगरमी बढ़नी शुरू हो गई है। हालांकि जिले की दो नगरपालिका और 10 नगर पंचायतों में ज्यादातर पर सपा और बसपा का ही कब्जा रहा है, लेकिन इस बार भाजपाई इसे भेदने में मनोयोग से जुड़ गए हैं। इस दफे पहली बार नवगठित माहुल नगर पंचायत में निकाय चुनाव कराए जाएंगे।
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यूं तो विधानसभा चुनाव के बाद ही निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगरमी बढ़ने लगी थी। परिसीमन आदि की प्रक्रिया शुरू होते ही चुनाव में भाग्य आजमाने वाले प्रत्याशी होर्डिंग्स और बैनर के साथ मैदान में उतर आए थे। लेकिन निकाय चुनाव टलने से इनकी प्रक्रिया थम सी गई थी। निकायों के कार्यकाल अब खत्म हो चुके हैं। प्रशासक नियुक्त किए जा चुके हैं। लेकिन अब हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार की ओर से नवंबर माह में चुनाव कराने का जवाब दाखिल करने के बाद राजनीति सरगर्मियां एक बार फिर तेज हो गईं हैं। जिले की दो नगर पालिकाओं और 11 नगर पंचायतों में एक-आध को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर पर सपा और बसपा का ही कब्जा रहा है। लेकिन इस बार सपा-बसपा के इस गढ़ को ध्वस्त करने के लिए भाजपाई सूरमाओं की फौज भी मैदान में उतरने को तैयार है। नगरपालिका आजमगढ़ में पिछले चुनाव में भाजपा समर्थित इंदिरा देवी जायसवाल पालिकाध्यक्ष बनी थीं, इससे पहले बसपा से शीला श्रीवास्तव इस कुर्सी पर काबिज रहीं। पालिका मुबारकपुर में पिछले चुनाव में डॉ. शमीम अहमद तीसरी बार अध्यक्ष निर्दल बने थे, लेकिन उनका झुकाव सपा की ओर ही रहा। बिलरियागंज में मो. आरिफ सपा के सहयोग से नगरपंचायत के चेयरमैन बने थे। इससे पहले भी यहां सपा का ही कब्जा था। जीयनपुर में पिछली बार फुरमुल्ली गुप्ता बसपा के सहयोग से चेयरमैन रहे। इससे पहले सपाई नंदलाल यादव यहां काबिज रहे। अजमतगढ़ में कांग्रेस के सहयोग से नीतू जायसवाल चेयरमैन बनी थीं। अब वो भाजपा में हैं। अतरौलिया नगर पंचायत में पिछले तीन बार से सपा की सावित्री देवी जायसवाल चेयरमैन की कुर्सी पर काबिज रही हैं। फूलपुर में निर्दलीय शिव प्रसाद चेयरमैन रहे है, लेकिन झुकाव सत्ता की ओर ही रहा। सरायमीर में पिछली बार सपा से राम प्रकाश यादव चेयरमैन बने, इससे पहले बसपाई उबैदुर्रहमान काबिज रहे। निजामाबाद में सपा से प्रेमा यादव और लालगंज में सपा से प्रमीला चेयरमैन बनी थीं। इससे पहले सीट भाजपा के भी कब्जे में रही। मेहनगर में रामबदन कन्नौजिया सपा के समर्थन से कुर्सी पर बैठे थे।
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