आजमगढ़। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग लखनऊ में मानदेय पर तैनात बाबू ने फर्जी तरीके से मदरसों को अनुदान दिला करोड़ों का काला साम्राज्य खड़ा कर लिया। उसकी पत्नी लखनऊ में नर्सिंग होम चलाती है और आजमगढ़ स्थित मदरसे से शिक्षिका का वेतन भी ले रही थी। पिछले दिनों अनुदानिक मदरसों की जांच के दौरान नियुक्ति में गड़बड़ी पाए जाने पर उसके वेतन पर रोक लगा दी गई थी। मदरसे में शिक्षिका की दो अन्य बहनों की नियुक्ति में भी गड़बड़ी पाई गई थी। अभी तक ये रिश्तेदार बाबू की मेहरबानी से वेतन उठा रही थीं। मुख्यमंत्री से की गई शिकायत में बाबू की 14 संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि बाबू की विभाग में पैठ इतनी गहरी है कि अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
शासन की ओर से पिछले दिनों जिले में कराई गई अनुदानित मदरसों की जांच के दौरान कई फर्जीवाड़े खुल कर सामने आए थे। जिलाधिकारी की रिपोर्ट के बाद 14 मदरसा शिक्षकों-कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी मिलने पर उनका वेतन रोक दिया गया था। इस जांच के बाद पिछली सरकारों के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की मदद से मदरसों में हुए फर्जीवाड़ों की पोल धीरे-धीरे खुलने लगी है। अब अन्य लोग भी इस फर्जीवाड़े के खिलाफ आगे आने लगे हैं। नफीस अहमद पुत्र मोहम्मद अब्बास निवासी अमिलो, सैय्यद आजम पुत्र मंजूर अहमद निवासी जहांगीरगंज, फिरोज आलम पुत्र
इंतायज निवासी इब्राहिमपुर, मो. हुसैन पुत्र हसन मोहम्मद निवासी मुबारकपुर, राजकुमार पुत्र कुमार निवासी मुबारकपुर और अहमद जलीसी पुत्र अहमद हसैन निवासी मुबारकपुर की ओर से मुख्यमंत्री को की गई शिकायत में आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग लखनऊ में मानदेय पर तैनात एक बाबू की मदद से ही अनुदानित मदरसों में ये फर्जीवाड़ा किया गया है। मानदेय पर तैनात बाबू ने कम समय में ही इस फर्जीवाड़े से करोड़ों की सम्पत्ति एकत्र कर ली है। शिकायतकर्ताओं की ओर से बाबू की इंदिरानगर, दोलाली, फैजाबाद रोज, हरिहरनगर और खुर्रम नगर लखनऊ, बाराबंकी, बहराइच तथा आजमगढ़ में 14 संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है।
बताया गया है कि बाबू ने अपने ससुर से मिलकर अपनी पत्नी को मदरसे की शिक्षिका बनवा दिया गया। जिसकी फर्जी नियुक्ति की पोल अनुदानित मदरसे की जांच के दौरान खुल चुकी है। बताया गया है कि उक्त शिक्षिका लखनऊ में क्लीनिक भी चलाती है और मदरसा न जाकर लगातार प्रैक्टिस करती है। अनुदानित मदरसे की जांच में उसके ऊपर कार्रवाई हुआ तो उसने बचने के लिए क्लीनिक में ताला जड़ दिया। शिकायत में ये भी बताया गया है कि बाबू की मदद से ही ससुर ने अपनी दो अन्य पुत्रियों को भी मदरसे में शिक्षिका के पद पर रखवाया था, जिनका वेतन रोका जा चुका है। इसी की मदद से जिले के अन्य मदरसों में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा किया गया है। बताया गया है कि मदरसों के अनुदान जारी कराने और रुकवाने में बाबू का खेल खूब चलता था। मुख्यमंत्री से बाबू की संपत्ति की जांच की मांग की गई है।