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जनमानस की सेहत बिगाड़ रहा है बायो मेडिकल वेस्ट

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आजमगढ़। आम जनमानस के लिए अब बायो मेडिकल वेस्ट खतरा बनता जा रहा है। इसके बाद भी इसके निस्तारण की दिशा में कोई खास काम नहीं हो रहा है। कहने को सभी अस्पतालों पर लाल, सफेद व नीली बाल्टियां रख दी गई हैं, लेकिन इनमें एकत्र किये जाने वाले कचरे का सही निस्तारण अब तक नहीं शुरू हो सका है। शासन द्वारा चिह्नित एक प्राइवेट कंपनी द्वारा जिले में अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट कलेक्ट किया जाता है, लेकिन यह संस्था भी अभी सभी पंजीकृत अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट कलेक्ट नहीं कर रही है।
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अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट जनमानस के लिए काफी नुकसानदायक है। पूर्व में इन्हें अस्पतालों द्वारा सामान्य कूड़ों के साथ इधर-उधर निस्तारित कर दिया जाता था, जिससे जन सामान्य में जहां बीमारियां फैलने का खतरा होता था तो वहीं पर्यावरण भी प्रदूषित होता था। जिसे देखते हुए एनजीटी ने इस पर लगाम लगाने का फरमान जारी किया था। जिले में वर्तमान में 361 पंजीकृत अस्पताल, क्लीनिक और नर्सिंग होम है। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में प्राइवेट अस्पताल बिना पंजीकरण के भी संचालित हो रहे है। नियम के अनुसार किसी भी अस्पताल का पंजीकरण तभी संभव है जब वह शासन द्वारा मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए नियुक्ति की गई कंपनी की एनओसी उपलब्ध कराता है। कुछ बड़े अस्पतालों को छोड़ दें तो मेडिकल वेस्ट के स्थायी निस्तारण की अब तक जिले में व्यवस्था नहीं बन सकी है। शासन द्वारा नियुक्त कंपनी ही लगभग 70 अस्पतालों से प्रतिदिन मेडिकल वेस्ट उठाती है और उसे निस्तारण के लिए गाजीपुर-मऊ बार्डर पर स्थापित अपने प्लांट पर भेजती है। दिखाने को तो सभी अस्पताल प्रशासन अपने यहां मानक के अनुरूप लाल, सफेद व नीली बाल्टियां रख लिये हैं, लेकिन उसमें एकत्र किये जाने वाले वेस्ट का सहीं निस्तारण अब तक नहीं हो रहा है।
गाजीपुर की कंपनी को मिला है ठेका
आजमगढ़। जिले में मेडिकल वेस्ट एकत्र करने और उसे निस्तारित करने का ठेका गाजीपुर की सिलकान वेलफेयर सोसाइटी को मिला हुआ है। इस कंपनी द्वारा ही प्रतिदिन अस्पतालों से कूड़ा उठाया जाता है, जिसे निस्तारण के लिए गाजीपुर जिले में स्थित कंपनी के प्लांट पर भेजा जाता है। कंपनी के सुपरवाइजर रुपेश त्रिपाठी ने बताया कि फिलहाल सभी सरकारी अस्पतालों के अलावा 60 से 70 प्राइवेट अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट हमारी टीम उठा रही है। अब प्रतिदिन कितना मेडिकल वेस्ट निकलता है यह तो हम नहीं बता सकते क्योंकि कभी उसकी तौल नहीं करायी गई है। संस्था से पंजीकृत अस्पतालों के कचरे कलेक्ट कर निस्तारण के लिए प्लांट पर भेजा जाता है।
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शासन ने मेडिकल वेस्ट निस्तारण की व्यवस्था के बाबत रिपोर्ट मांगी है। जिसके लिए विभाग की एक टीम गठित कर दी गई है। यह टीम सभी अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का हाल लेगी और अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजेगी। इस टीम में डॉ. एके सिंह को नोडल बनाया गया है। इसके साथ ही टीम में डॉ. सुभाष पटेरिया, सिद्घनाथ सिंह व कुमारी लकी पांडेय को बतौर सदस्य शामिल किया गया है।
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डॉ. एके मिश्रा, सीएमओ, आजमगढ़।
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