अहरौला। सरकार ने बजट में किसानों के लिए छह हजार रुपये सालाना प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि देने की घोषणा की है। इस फैसले की किसानों से सराहना की है। लेकिन, कई किसानों और किसान नेताओं ने इसकी धनराशि में बढ़ोतरी किए जाने की मांग की है।
इसहाकपुर गांव के प्रगतिशील किसान रामदास चौहान का कहना है कि सरकार ने किसानों के लिए बजट में जो प्रावधान किया है वो किसानों के हित में है। लेकिन सरकार की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी भ्रष्टाचार के पहुंचे ये सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। बजट में दो हेक्टेयर भूमि वाले किसानों को किश्तों में 6000 रुपये देने की घोषणा की है लेकिन ये अगर एक ही किश्त में मिलती तो किसानों का कुछ भला होता।
बस्ती भुजबल गांव निवासी किसान लक्ष्मी चौबे का कहना है कि सरकार किसानों के लिए अच्छा काम कर रही है। किसानों को 2,00,000 तक बिना ब्याज पर कर्ज, दो हेक्टेयर वाले किसानों को 6000 रुपये सालाना, मजदूरों को 1000 से 3000 पेंशन, ये अच्छी पहल है। बजट में श्रमिक से लेकर किसान मजदूर सब का ध्यान रखा गया है।
युधिष्ठिर पट्टी के किसान कोमल प्रजापति का कहना है कि सरकार ने किसानों के लिए अच्छी पहल की है। आज सरकार के छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े कर्मचारी तक की तनख्वाह आजादी के बाद से ढाई सौ से 300 गुना बढ़ चुकी है लेकिन किसान बेचारा आज वहीं का वहीं पड़ा हुआ है। 6000 रुपये देने वाली घोषणा किसानों के लिए ऑक्सीजन का काम तो कर सकता है लेकिन सरकार को किसान आयोग भी बनाना चाहिए।
किसान नेता कामरेड त्रिलोकी नाथ का कहना है कि हम लोग किसानों मजदूरों की लड़ाई बहुत पहले से लड़ रहे हैं। किसानों के लिए 10,000 मासिक पेंशन की मांग भी कर रहे हैं। अगर मजदूरों के लिए केंद्र सरकार 1000 से 3000 तक पेंशन देने की बात कह रही है तो इससे कुछ होने वाला नहीं है। कम से कम 10,000 रुपये हर माह इन्हें पेंशन दी जानी चाहिए। दो हेक्टेयर वाले किसानों को 6000 रुपये देने की पहल अच्छी है। लेकिन, यह ऊंट के मुंह में जीरा है। कम से कम सरकार को 12,000 रुपये सालाना किसानों को देना चाहिए जो किसानों का हक है।