आजमगढ़। केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को लोकसभा में अंतरिम बजट पेश किया। एक ओर जहां भाजपा इस बजट को ऐतिहासिक बता रही है, वहीं विरोधी दल इसे चुनावी बजट करार दे रहे हैं। विरोधी दलों का कहना है कि ये बजट किसानों, मध्यम वर्ग और व्यापारियों को झुनझुना थमाने जैसा है। उनका कहना है कि इनकम टैक्स का स्लैब तो बढ़ाया गया लेकिन छूट में कमी नहीं की गई। इसमें किसानों को टारगेट तो किया गया है लेकिन कारोबारियों, व्यापारियों को राहत नहीं दी गई। जबकि भाजपा का दावा है कि इस बजट में मध्यम वर्ग और किसानों के हित का ध्यान रखा गया है। नौकरी पेशा लोगों को राहत प्रदान की गई है।
यह बजट चुनावी है, व्यवहारिक नहीं। बजट में दो हेक्टेयर के किसानों को छह हजार रुपये किश्तों में देने का प्रावधान किया गया है। ये किश्त किसानों को जुलाई में मिलेगा। अगर इनकी सरकार नहीं बनी तो ये किसानों को कहां देंगे। देना ही था तो तत्काल देते। चुनाव के दौरान किसानों के क्रेडिट कार्ड पर ब्याज न लेने का वादा किया गया था लेकिन बजट में इसकी घोषणा नहीं की गई। इनकम टैक्स का स्लैब बढ़ा लेकिन छूट में कमी नहीं की गई। छोटे मझोले कारोबारियों का राहत नहीं दी गई। यह बजट चुनावी है व्यावहारिक नहीं। - हवलदार सिंह, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
सरकार का बजट लोक लुभावना है और पूरी तरह से चुनावी भी। यह सरकार की जुमलेबाजी है। कहने को सरकार ने लोगों को बहुत कुछ देने का वादा किया था लेकिन जब देने की बात आई तो कुछ नहीं दिया। इस बजट में जो उन्होंने घोषणा की है उसमें व्यापारियों के लिए कुछ नहीं है। यह पूरा भी होगा या नहीं यह कोई नहीं जानता। क्योंकि जल्द ही लोकसभा चुनाव होने हैं। इन बजट से सरकार ने जनता को गुमराह करने का काम किया। जनता सब कुछ जान चुकी है, वह गुमराह होने वाली नहीं है। - अरविंद कुमार, जिलाध्यक्ष, बसपा
यह बजट भाजपा का चुनावी स्टंट है। इसमें किसानों को टारगेेट किया गया है। लेकिन, सरकार इसके पहले बिजली, डीजल, खाद और यंत्रों की कीमतों में इतनी वृद्धि कर चुकी है कि किसानों को कोई फायदा नहीं होने वाला। किसानों को पांच हजार रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से योजना का लाभ मिलना चाहिए। इस बजट में बेरोजगारों के लिए कुछ नहीं है। मजदूरों को पेंशन देने की घोषणा महज जुमलेबाजी है। इस बजट में महंगाई को कम करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कुल मिलाकर यह बजट चुनावी बजट है। - हवलदार यादव, जिलाध्यक्ष, सपा
यह एक ऐतिहासिक बजट है जिसमें सरकार ने हर वर्ग का ध्यान रखा है। किसान, बेरोजगार, नौजवान, महिलाएं, कर्मचारी सभी के लिए यह बजट हितकर है। सरकार ने किसानों को छह हजार रुपये वार्षिक देने का फैसला कर ऐतिहासिक कदम उठाया है। मध्यम और नौकरी पेशा लोगों का इनकम टैक्स स्लैब ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया है। मजदूरों को लिए भी सरकार ने इस बजट में पेंशन की व्यवस्था की है। कुल मिलाकर यह बजट सभी वर्गों के लिए हितकर है। - जयनाथ सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा