आजमगढ़। शासन के समय सीमा के अंतर्गत जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने पूरे जनपद को ओडीएफ घोषित कर दिया है। 15 दिसंबर को केंद्रीय टीम जांच के लिए भी आने वाली है। इसके लिए जनपद 520 ऐसे गांवों का चयन किया गया है, जिसे मंडलीय अधिकारी भी वेरीफाइड कर चुकी है। इन्हीं गांवों में से एक पवई ब्लॉक का भीमलपुर ग्राम सभा जिला प्रशासन के दावों की पोल खोल रहा है। गांव में बेसलाइन सर्वे में शामिल कुल 261 शौचालय बनाए तो गए हैं, लेकिन एक भी मानक के अनुसार नहीं हैं।
शासन की ओर से पहले दो अक्तूबर तक जनपद को ओडीएफ कराने की समय सीमा रखी गई थी। हालांकि अभी सरकार की ओर से ही शौचालयों की ओर से पूरी धनराशि जनपदों को नहीं भेजी गई थी। इसलिए ओडीएफ कराने के लिए दो माह का और समय दिया गया। इसकी तिथि 30 नवंबर रखी गई। अब ये तिथि भी निकल चुकी है। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने पूरे जनपद को ओडीएफ घोषित कर दिया है। जनपद ओडीएफ हुआ कि नहीं, शौचालय पूरे बने की नहीं, इसकी जांच के लिए केंद्रीय टीम के जल्द जनपद में आने की बात कही जा रही है।
15 दिसंबर की तारीख भी बताई जा रही है। जनपद को ओडीएफ घोषित तो कर दिया गया है, लेकिन अभी मंडलीय टीम की ओर से 1871 ग्राम सभाओं के कुल 3931 राजस्व गांवों पर मुहर नहीं लगाई गई है। अभी तक मात्र 520 गांवों को ही डीडी पंचायत की ओर से वेरीफाइड किया गया है। इसलिए केंद्रीय टीम के निरीक्षण के लिए इन्हीं गांवों का चयन किया गया। इन गांवों में पवई ब्लाक के भीमलपुर ग्राम सभा के राजस्व ग्रामों में जांच के लिए यूनीसेफ की टीम पहुंची तो उसकी पोल खुल गई।
गांव में बेसलाइन सर्वे में शामिल कुल 261 शौचालय बनाए गए हैं। ग्राम सभा के राजस्व ग्राम चक मोलनापुर, भीमलपुर और चर रेवा में एक भी शौलाय मानक के अनुसार नहीं हैं। मानक के अनुसार शौचालय में दो जालीदार गड्ढे होने चाहिए। एक भी शौचालय में दो गड्ढे नहीं बने है। इसके साथ ही लिंटर छत की जगह पर टीन शेड लगाया गया है। कहीं वेस्टर्न टायलेट है तो कहीं कुछ और। निरीक्षण के दोरान सेक्रेटरी और सफाईकर्मी को एक्टिव नहीं पाया गया। ऐसे लोगों को भी शौचालय दिया गया जो बेसलाइन में नहीं थे। शौचालय के लिए धन उगाही की बातें भी सामने आई है। मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है।