आजमगढ़। सरकार द्वारा खेल का बढ़ावा देने के लिए अनेक घोषणाएं की जाती हैं। लेकिन इन सुविधाओं का कितना फायदा खिलाड़ियों को मिल रहा है इसकी पड़ताल करने वाला कोई नहीं है। जिले का एक मात्र सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम अपने हाल पर आंसू बहा रहा है। स्टेडियम में बरसात में आउटडोर गेम बंद हो जाते हैं। क्योंकि स्टेडियम में लबालब पानी भर जाता है, जिसे निकालने की कोई व्यवस्था नहीं है। क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी चार्ज लेने के बाद से छुट्टी पर चल रही हैं। इंडोर गेमों में बैडमिंटन के लिए बना हाल जगह-जगह से टपक रहा है इसकी मरम्मत कराने वाला भी कोई नहीं है।
जनपद का एक मात्र स्टेडियम सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम अपने हाल पर आंसू बहा रहा है। ऐसे में खिलाड़ियों का तैयार होना सपने सा ही है। स्टेडियम में सुधार की जिम्मेदारी क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी मुद्रिका पाठक के कंधों पर हैं जो 27 अक्टूबर 2017 को चार्ज लेने के बाद से ही छुट्टी पर हैं। उनका चार्ज मऊ के क्रीड़ाधिकारी डा. अतुल सिन्हा को दिया गया है। लेकिन दो जगहों का चार्ज होने के कारण वह भी स्टेडियम की दुर्दशा की ओर ध्यान नहीं दे पाते हैं। स्टेडियम में पिछले दिनों हुई बारिश के बाद से लगभग 15 दिन तक स्टेडियम में आउटडोर गेम नहीं हो सके। क्योंकि पूरे मैदान में पानी भरा हुआ था। जब पानी सूखा तो घास इतनी बढ़ चुकी थी कि उनमें खेलना संभव नहीं है। इनके छंटाई की व्यवस्था अभी तक नहीं की गई है। जो थोड़ी बहुत जगह बचती है उसी में कुछ खेलों के खिलाड़ी खेलते हैं। बैडमिंटन में जिले से कई खिलाड़ियों ने देश और देश के बाहर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया लेकिन दुर्भाग्य तो यह है कि कई वर्षों से यहां बैडमिंटन के किसी कोच की तैनाती नहीं हुई। कुछ संगठनों द्वारा अपने स्तर से खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने का कार्य किया जाता है। बैडमिंटन के लिए बनाया गया इनडोर कोर्ट जगह-जगह से खराब हो चुका है जिसके कारण बरसात के मौसम में पानी टपकता है। स्टेडियम परिसर में 48.50 लाख रुपये की लागत से सिंथेटिक बास्केटबाल ग्राउंड में खेल शायद ही हुआ हो और यह आज सड़कर खराब हो चुका है।
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स्टेडियम में खेल और कोच की स्थिति
खेल कोच
- फुटबाल, प्रमोद जायसवाल
- कुश्ती रामसजन यादव
- जिम्नास्टिक रीमा यादव
- क्रिकेट शंभू प्रकाश
- कबड्डी माया प्रसाद राय
- बैडमिंटन नहीं
- हाकी नहीं
- वालीबाल नहीं
- हैंडबाल नहीं
- बास्केट बाल नहीं
मुझे स्टेडियम में पानी लगने की जानकारी नहीं थी और ना ही किसी ने मुझे अवगत कराया। लेकिन अब यह प्रकरण मेरे संज्ञान में आ गया है तो इसकी व्यवस्था करा दी जाएगी। घासों को ग्राउंड के सूखते ही काट दिया जाएगा। रही बात बैडमिंटन कोर्ट में पानी टपकने की तो यह थोड़े पैसे से नहीं होने वाला है। इसके लिए आगणन बनवाकर शासन को भेज दिया जाएगा। वहां से पैसा आते ही इसकी मरम्मत करा दी जाएगी।
डा. अतुल सिन्हा, प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी।