सरकार परिषदीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों की तर्ज पर संचालित करने की योजना पर काम कर रही है लेकिन एक तरफ विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ने की बजाय घटती जा रही है।
वहीं दूसरी ओर जिले के 13 विद्यालयों में आज तक बिजली की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इसके कारण बच्चे गर्मी के बीच बरामदे और कमरे में बैठकर पढ़ने को विवश हैं।
जिले में कुल 2706 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें से कुछ दिन पहले तक 136 विद्यालय ऐसे थे, जिनमें बिजली का कनेक्शन ही नहीं था। बेसिक शिक्षा विभाग ने विद्युत निगम को कनेक्शन करने के लिए पत्र भेजा और एस्टिमेट के आधार पर धन का भुगतान भी कर दिया, लेकिन अभी तक 13 विद्यालय ऐसे हैं, जहां बिजली का कनेक्शन नहीं हो सका है।
कहीं 20 साल तो कहीं 49 साल से बिजली के दर्शन नहीं हो सके हैं। बिजली न होने के कारण गर्मी और उमस के बीच कमरे और बरामदे में पढ़ने के लिए विवश होते हैं। हालांकि, यहां तैनात प्रधानाध्यापकों द्वारा कई बार इस संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक इनमें कनेक्शन नहीं हो पाया है।
सरकार की ओर से बच्चों की कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य किया गया है। बिजली न होने के कारण इन विद्यालयों के बच्चे कंप्यूटर का ज्ञान भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं।
00
कंपोजिट स्कूल में 49 साल से बिजली नहीं
अतरौलिया। विकास खंड के कंपोजिट स्कूल अनंतपुर में करीब 49 वर्षों से बिजली नहीं पहुंची है। बिजली के अभाव में 246 बच्चे गर्मी में बरामदे या पेड़ों की छांव में पढ़ते हैं। विद्यालय में बच्चों को शिक्षा के लिए आईसीटी लैब की स्थापना की गई है। एक तो बिजली न रहने के कारण इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। दूसरे, आईसीटी लैब की छत से बरसात में पानी भी टपकता है।
00
20 साल से बिजली विहीन कंपोजिट विद्यालय
रानी की सराय। विकास खंड के ईश्वरपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय में भी बिजली नहीं है। यहां पर 112 बच्चे पंजीकृत हैं। जो बिजली के अभाव में गर्मी और उमस को झेलते हुए पढ़ाई करने को विवश हैं। इसे लेकर प्रधानाध्यापक 20 साल से प्रयास कर रही हैं, लेकिन अब तक विद्यालय में बिजली नहीं पहुंच सकी है। विद्यालय में पंखे तो लगे हैं, लेकिन बिजली के अभाव में बंद हैं।
00 वर्जन
20 साल पहले मैं यहां आई थी। तब से विद्यालय में बिजली नहीं है। इसे लेकर हमने करीब 20 बार बीआरसी पर शिकायत की, लेकिन अब तक हमारे विद्यालय में बिजली नहीं पहुंच सकी है। -विद्यावती यादव, प्रधानाध्यापक।
हमने 12 मार्च 2025 को 1,91,983 रुपये का एस्टिमेट बीएसए आजमगढ़ को भेजा था। विद्यालय से महज 300 मीटर दूर बिजली के खंभे और तार मौजूद हैं। विद्यालय की दक्षिण दिशा में 70 मीटर और पश्चिम में 110 मीटर बाउंड्री जर्जर है। परिसर में गहरे गड्ढे में बारिश का पानी जमा रहता है, जिससे बच्चों को खतरा है। आईसीटी लैब की छत भी टपकती है। -भगवानमणि त्रिपाठी, प्रधानाध्यापक।
00
जिले के 136 परिषदीय विद्यालयों में पहले बिजली के कनेक्शन नहीं थे। विद्युत निगम को सभी विद्यालयों का स्टीमेट तैयार कर भुगतान कर दिया गया है। अब मात्र 13 विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें कनेक्शन नहीं है। निगम इस पर काम कर रहा है। उम्मीद है जल्द ही हमारे सभी विद्यालयों में बिजली का कनेक्शन हो जाएगा। -अनिल सिंह, निर्माण जेई, बेसिक शिक्षा विभाग।
अतरौलिया के अनंतपुर में बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते बच्चे। संवाद- फोटो : सांकेतिक