आजमगढ़। परंपरागत कृषि विकास योजनान्तर्गत जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए गुरुवार को बिलरियागंज की भलुआई ग्राम सभा में चयनित कलस्टर के किसानों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। उप कृषि निदेशक डॉ. आरके मौर्य ने बताया कि किसानों को जैव उर्वरक, जैविक कीटनाशक तथा मृदा में जीवांश मात्रा बढ़ाने के लिए हरी खाद के रूप में सनई, ढैचा प्रयोग किए जाने पर बल दिया। कीट-रोग व्याधियों से पौधों को बचाने के लिए जैविक विधि से बीज शोधन भूमि शोधन की जानकारी दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान राजेश सिंह ने की।
वैज्ञानिक डा. अखिलेश कुमार ने हरी जैविक खेती की महत्व पर प्रकाश डाला। डा. सीएल शर्मा ने जैविक खेती के लिए खेत की तैयारी, नर्सरी में पौधों को उगाना और वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण कर रासायनिक उर्वरक के स्थान पर इनका प्रयोग करने पर बल दिया। बताया कि प्रत्येक कलस्टर से 50-50 किसानों का जैविक खेती के लिए चयन किया गया है। चयनित किसानों को चरणवद् तरीके से कृषि निवेश के रूप में तीन वर्षो में 29,900 रुपये का अनुदान प्रति एकड़ की दर से देय होगा। चयनित किसानों को सहभागिता प्रतिपूर्ति प्रणाली (पीजीएस) के अन्तर्गत पंजीकृत किया गया है। जैविक खेती करने वाले सभी किसानों के उत्पादन को राष्ट्रीय जैविक खेती केन्द्र हरा निर्गत जैविक उत्पादन प्रमाण पत्र के आधार पर कृषि उत्पादकों को अधिक मूल्य पर क्रय करने की गारंन्टी दी जाती है। कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी भी दी गई।