आजमगढ़। शहर के एक अदद पार्क के लिए तरस रहा है। कुंवर सिंह उद्यान को छोड़ दिया जाए तो शहर में कोई ऐसा स्थान नहीं है जहां सुकून के दो पल बिताए जा सके। पार्क के लिए आंदोलन भी हो चुके है, वहीं अमृत योजना के तहत हरित पार्क के लिए चयनिक मेहता पार्क धरना स्थल बनकर रह गया है। मेहता पार्क को वर्ष 2016-7 में हरित पार्क के लिए चयनित किया गया था। करोड़ों का प्रस्ताव तैयार कर स्टेट हाई पावर कमेटी को भेजा गया था, जिसे मंजूरी भी मिल गई थी। लेकिन न शासन से धन का आवंटन हुआ न ही पालिका के अधिकारियों ने इसकी सुधि ली। कु ंवर सिंह उद्यान को छोड़ दिया जाए तो शहर में पार्क के नाम पर कोई ऐसा स्थान नहीं है जहां दो पल सुकू न के बीता सके। पुरानी जेल की जमीन को पार्क बनाने के लिए आंदोलन तक हुआ। अमृत योजना के तहत इसका चयन हुआ और धनराशि भी स्वीकृत हो गई, लेकिन जेल विभाग की ओर से जमीन नगर विकास विभाग को नहीं देने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आये रुपये भी वापस चले गए। मजे की बात ये है कि इसी पुरानी जेल की जमीन पर विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन पार्क के लिए जमीन नहीं दी जा रही है। 2016-17 अमृत योजना के तहत ही हरित पार्क के लिए कलक्ट्रेट के ठीक सामने स्थित मेहता (आंबेडकर) पार्क का भी चयन हुआ। पालिका की ओर से इसे हरा भरा बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के पौधे लगाने, कार्ययोजना तैयार कर स्टेट हाई पावर स्वीकृति कमेटी (एसएचपीएससी) के पास भेजी गई। कमेटी ने इसका अनुमोदन भी कर दिया। इसके बाद भी योजना के तहत पार्क की दशा सुधारने को धन आवंटन नहीं किया गया। न ही स्थानीय अधिकारियों की ओर से इस दिशा में कोई प्रयास किया गया। नतीजा ये है कि पार्क इस समय पूरी तरीके से धरना स्थल बन चुका है। बकायदा राजनीतिक पार्टियों की ओर से इसका प्रयोग जनसभा और विरोध-प्रदर्शन के लिए किया जाता है। मजे की बात ये है ईओ वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव से हरित पार्क के बारे में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने इस संबंध में जानकारी से ही इंकार कर दिया।
2016-17 में मेहता पार्क को अमृत योजना के तहत हरित पार्क में चयनित करने की जानकारी मिली है। इसे एसएचपीएससी का अनुमोदन भी मिला था। पार्क की दशा सुधारने के लिए धन आवंटन क्यो नहीं हुआ इसकी जानकारी की जाएगी। शासन को रिमाइंडर भेजा जाएगा। नरेंद्र सिंह, एडीएम प्रशासन