आजमगढ़। आयुक्त ग्राम्य विकास पार्थसारथी सेन शर्मा द्वारा 13 फरवरी को राज्य स्तर पर ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा की गई। जिसमें प्रदेश 234 विकास खंड ऐसे मिले जहां तृतीय किस्त जारी होने के बाद भी आवासों के पूर्णता की स्थिति पांच प्रतिशत से कम मिली। लेकिन अपने जनपद का कोई भी ऐसा विकास खंड नहीं मिला जहां आवास की पूर्णता पांच प्रतिशत से कम मिली।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर जिला प्रशासन कितना गंभीर है इसका अंदाजा 13 फरवरी को आयुक्त ग्राम्य विकास द्वारा प्रदेश के सभी जनपदों की समीक्षा में लगा। जहां प्रदेेश के कई जनपदों के कई विकास खंडों में आवास निर्माण की प्रगति पांच प्रतिशत से कम मिली। वहीं अपने जनपद में कोई भी ऐसा विकास खंड नहीं मिला जहां आवास की पूर्णता पांच प्रतिशत से कम रही हो। इस आयुक्त ग्राम्य विकास ने जिले के अधिकारियों की पीठ थपथपाई है। वहीं अगर पांच प्रतिशत से कम पूर्णता वाले जनपदों की स्थिति देखें तो प्रदेश के 234 विकास खंड ऐसे मिले जहां आवास निर्माण की तृतीय किश्त जारी होने के बाद भी स्थिति दयनीय पाई गई।
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जनपद में प्रधानमंत्री आवास पर अच्छा काम हुआ है। इसमें निरंतर प्रगति हो रही है। आयुक्त ग्राम्य विकास ने जिन जनपदों में खराब पाई है उन जनपदों के विकास खंडों के अधिकारियों और कर्मचारियों को समीक्षा कर लापरवाही बरतने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। -अभिषेक सिंह, मुख्य विकास अधिकारी।
इनसेट-
इसमें आगरा के पांच, अंबेडकर नगर का एक, औरैया के चार, बहराइच का एक, बलिया के दो, बलरामपुर के दो, बांदा के सात, बरेली के छह, विजनौर के आठ, बुलंदशहर के सात, चंदौली के दो, अमेठी के पांच, चित्रकूट के चार, देवरिया के दो, एटा के एक, फर्रूखाबाद के चार, फिरोजाबाद एक, गाजीपुर के तीन, गोरखपुर के आठ, हमीरपुर के छह, हरदोई के 17, जालौन के एक, जौनपुर के 12, झांसी के दो, कानपुर देहात के चार, कानपुर नगर के छह, खीरी के छह, कुशीनगर के 11, लखनऊ के दो, हाथरस के दो, महराजगंज के चार, महोबा के एक, मऊ के नौ, मेरठ के दो, सिद्घार्थ नगर के चार, सीतापुर के 18, सोनभद्र के दो, सुल्तानपुर के आठ और उन्नाव के 15 विकास खंड चिह्नित किए गए हैं। जिनकी प्रगति सर्वाधिक खराब है। प्रदेश के 54 विकास खंड ऐसे पाए गए जिनके आवास पूर्णता की प्रगति तृतीय किश्त के सापेक्ष शून्य है।