आजमगढ़। ठंड के मद्देनजर राज्य सड़क परिवहन निगम ने अभी तक कोई तैयारी नहीं की है। निगम की यह लापरवाही यात्रियों पर भारी पड़ रही है। आलम यह है कि ज्यादातर सरकारी और अनुबंधित बसों की खिड़कियों के कांच ढीले हैं। ऐसे में यात्री खुली खिड़की के पास बैठकर यात्रा करने को मजबूर हैं। सभी बसों में अभी फॉग लाइट भी नहीं लग पाई है। वाइपर न होने से भी चालकों को परेशानी हो रही है। घना कोहरे की वजह से लंबी दूरी का सफर तय करने में घंटों का वक्त जाया हो रहा है।
प्रदेश के दस बड़े डिपो की सूची में शामिल आजमगढ़ रोडवेज से प्रदेश के हर कोने में बसें जाती हैं और अन्य डिपो से बसें आती हैं। अधिकारियों ने लंबी दूरी जैसे लखनऊ, दिल्ली, कानपुर, गोरखपुर, इलाहाबाद आदि के मार्ग पर नई बसों का संचालन करते हैं। कम दूरी वाले मार्ग पर पुरानी और खटारा बसों का संचालन करते हैं। इनमें आजमगढ़-वाराणसी मुख्य मार्ग पर ज्यादातर सरकारी बसों के अलावा बड़े पैमाने पर अनुबंधित बसों का संचालन होता है। आजमगढ़ रीजन में कुल 471 बसें हैं। डिपो से वाराणसी, मऊ, बलिया आदि जिला मुख्यालयों के लिए अनुबंधित बसों का संचालन होता है। इसमें ज्यादातर बसें आजमगढ़-वाराणसी मुख्य मार्ग पर चलती हैं। इस मार्ग पर आजमगढ़, वाराणसी से संचालित होने वाली ज्यादातर बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। इनके शीशे आदि टूटे और ढीले हैं। ऐसे में इन बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों को ठंडी हवा खाते हुए यात्रा करनी पड़ रही है। सरकारी बसें के संबंध में डिपो में शिकायत करने पर अधिकारी पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि अनुबंधित बसों के संबंध में प्राइवेट गाड़ी बताकर मामले का इतिश्री कर देते हैं। इसके अलावा लंबी दूरी की बसों में कोहरे से निपटने के लिए आलवेदर बल्व लगाया गया है। लेकिन कम दूरी की बसें भगवान भरोसे हैं। यही कारण है कि कम दूरी की बसों को घने कोहरे में यात्रा करने में अधिक समय जाया करना पड़ता है। आजमगढ़ रीजन के क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद्रनाथ यादव ने बताया कि कोहरे से निपटने के लिए सभी लंबी दूरी की बसों में आलवेदर बल्ब लगा दिया गया है। बसों के शीशे आदि दुरुस्त हैं। यदि किसी में कोई गड़बड़ी है तो उसकी शिकायत मिलने पर उसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा।