बलरामपुर। कहने को तो मंडलीय अस्पताल आधुनिक चीर गृह बना दिया गया, लेकिन विभागीय और शासन की अनदेखी के कारण शवों के साथ अनदेखी हो रही है। शव रखने के लिए वातानुकूलित कमरा होते हुए भी इसे पुरानी मोर्चरी में फेंक दिया जाता है। टपक रही छतों के बीच शव के आसपास कीड़े मंडराते रहते हैं। पुरानी मोर्चरी का चार वार्ड का डीप फ्रीजर भी तीन साल से खराब पड़ा है।
मंडलीय अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए दिसंबर 2015 आधुनिक चीर गृह बनाकर इसके अस्पताल प्रशासन को हैंडओवर किया गया था। इसमें शव को रखने के लिए एसी रूम बना है। लेकिन पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारी शवों को वहां इसलिए नहीं रखने देते क्योंकि शव से बदबू आने लगती है। एक्सरे रूम भी है, लेकिन आज तक इसे मशीन उपलब्ध नहीं हो पाई। ऐसे में गोली लगे शवों का एक्सरे वहीं होता है, जहां आम मरीजों का एक्सरे होता है। इसके कारण कभी-कभी तो बवाल की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। अनदेखी के कारण शवों को आज भी पुरानी मोर्चरी में रखा जाता है। यहां शवों की बेकद्री की हालत ये है कि छत बारिश में टपकती रहती है। साथ शव के आसपास कीड़े चलते रहते हैं। यहां भी शव को रखने के लिए बना चार वार्ड का डीप फ्रीजर तीन साल से खराब पड़ा है। लावारिस शवों को ऐसे ही जमीन पर डाल दिया जाता है। बताते चलें कि लावारिस शव को पहचान के लिए तीन दिन तक रखना जरूरी होता है। उसके बाद ही पोस्टमार्टम कर उसका अंतिम संस्कार किया जाता है।
चौकीदार न रखने से हो चुकी है चोरी
आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस पर आज तक चौकीदार की भी तैनाती नहीं की जा सकी है। इसके कारण कई बार चोर इसे निशाना भी बना चुके हैं। इसकी शिकायत कई बार लिखित में सीएमओ से की जा चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
सेवानिवृत्त स्वीपर पर सारी जिम्मेदारी
आधुनिक चीर गृह पर एक माह में 30 डाक्टरों की ड्यूटी पोस्टमार्ट के लिए लगती है। विशेष परिस्थितियों में इसे बढ़ाया भी जाता है। कहने को तो यहां दो स्वीपर की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन एक सेवानिवृत्त स्वीपर ही पोस्टमार्टम हाउस की सारी जिम्मेदारी संभाल रहा है। यहां दो वार्ड ब्वाय, दो चौकीदार, दो बाबू और एक फारेंसिंक एक्सपर्ट भी होना चाहिए, लेकिन सभी पद खाली हैं। दो फारेंसिंक फार्मासिस्ट काम चला रहे हैं।
मोर्चरी जर्जर हैं। इसे सही कराने के लिए शासन से बजट की मांग की गई है। खराब डीप फ्रीजर के बारे में जानकारी नहीं है। इसे सही कराया जाएगा।
डॉ. श्रीकांत तिवारी, सीएमओ