अयोध्या। केंद्रीय बजट की घोषणा के अनुसार कैंसर और मधुमेह की सस्ती दवाएं फिलहाल तुरंत नहीं मिल सकेंगी। इसके लिए रोगियों को अभी दो-तीन माह का इंतजार करना पड़ेगा। इसके पीछे बाजार में पुराना स्टॉक डंप होना मुख्य वजह मानी जा रही है।
अनियमित दिनचर्या से लगभग हर दूसरा व्यक्ति अब मधुमेह की चपेट में आ रहा है। वहीं, कैंसर भी तेजी से पांव पसार रहा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में ही लगभग 1200 कैंसर रोगियों का इलाज हो चुका है। ऐसे में इन रोगों से जिले की बड़ी आबादी प्रभावित है, जिन्हें दवाओं पर हर माह मोटी रकम चुकता करना पड़ता है। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
केंद्र सरकार ने बीते दिनों पेश किए बजट में ऐसे रोगियों को बड़ी राहत देने की घोषणा की है। इसके तहत कैंसर और मधुमेह की दवाओं पर लगभग 30-35% तक की छूट का प्रावधान किया गया है। हालांकि, अभी तक बाजार में पुरानी एमआरपी की दवाएं मौजूद हैं। इस वजह से रोगियों को त्वरित लाभ तो नहीं मिलेगा, लेकिन भविष्य में नई दरें आने पर सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
300 से 2500 रुपये तक मिलती हैं कैंसर की दवाएं
केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री आनंद अग्रहरि ने बताया कि कैंसर की दवाएं 300 से 2500 रुपये तक मिलती हैं। इसी तरह मधुमेह की दवाएं 15 रुपये टैबलेट से लेकर 70-75 रुपये प्रति टैबलेट तक बिकती हैं। ऐसे में इस फैसले से इन रोगियों को काफी राहत पहुंचेगी। हालांकि, जब तक पुराने बैच की दवाएं समाप्त नहीं हो जातीं, तब तक कंपनी नए बैच की दवाएं नहीं बनाती है। दवा निर्माता कंपनियों के पास अनुमानित दो महीने का स्टॉक होता है। इसके बाद ही बाजार में नए बैच की दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। यदि सरकार दवाओं का दाम घटाकर बेचने का प्रावधान करती है तो जीएसटी की तर्ज पर घटी दरें तुरंत मिल सकती थीं।