श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने मंडलायुक्त लखनऊ को भेजे ई-मेल में आरोप लगाया है कि राम मंदिर में दान, चढ़ावे और आभूषणों के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि एक मुकुट गायब हो गया था, लेकिन संदिग्ध लोगों से पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया और कोई पुलिस कार्रवाई नहीं हुई। महिपाल ने आरोप लगाया कि रामलला के लिए 150 किलो चांदी भेजकर झूला बनवाया गया, लेकिन तैयार झूला केवल 85 किलो का आया।
भरतकुटी में बिना रसीद प्राप्त निधि संग्रह की राशि चोरी होने का भी आरोप लगाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गणना के दौरान बैंक में कम राशि का वाउचर भरवाकर धन का गबन किया जाता था तथा इसकी जानकारी देने पर उन्हें गणना कार्य से हटा दिया गया।
ट्रस्ट की निधि के दुरुपयोग और फर्जी मानदेय भुगतान का भी आरोप उन्होंने लगाया है। दावा किया कि निर्माण करने वाली फर्मों के भुगतान रोके गए, बाद में बिल बढ़वाकर भुगतान किए गए तथा कुछ असत्यापित बिलों का भी भुगतान हुआ। निशुल्क उपलब्ध पत्थरों के बजाय कम गुणवत्ता वाले पत्थर ऊंचे दाम पर खरीदे गए।
विवादित मठ-मंदिर और संपत्तियां ऐसे लोगों से खरीदी गईं जिनका वैध कब्जा नहीं था, जिससे ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। महिपाल ने दावा किया कि ट्रस्ट गठन के समय मंदिर निर्माण का अनुमानित बजट 800 करोड़ रुपये था, जबकि अब 2200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुका है। वीआईपी दर्शन, वाहनों की एंट्री, प्रसाद और शृंगार के खर्चों में भी अनियमितताएं हुईं। शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।