अयोध्या। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान मोंथा के प्रभाव के चलते दो दिन तक हुई बारिश के बाद शनिवार से मौसम का बिगड़ा मिजाज सुधर गया। बारिश का दौर थमने के बाद बादलों और सूर्य की अठखेलियों के बीच अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान में इजाफा हुआ। ऐसे में ठंड और सिहरन का प्रभाव भी थोड़ा कमजोर पड़ा।
शनिवार को लोग नींद से जागे तो आसमान में बादल छाए थे लेकिन बारिश में ठहराव आ गया था। इसके बाद दिन चढ़ने के साथ कभी हल्की धूप निकल आती तो कभी सूर्य बादलों की ओट में छिप जाते। यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। बारिश थम जाने से पिछले दो दिनों से प्रभावित जनजीवन काफी हद तक सामान्य हो गया। सबसे ज्यादा राहत किसानों काे मिली। यह अलग बात है कि उन्हें जो नुकसान होना था, वह हो चुका है।
ऐसे में ही अधिकतम तापमान शुक्रवार की तुलना में 5.5 डिग्री बढ़ने के साथ सामान्य से 1.0 डिग्री कम 29 पर पहुंच गया। जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.8 डिग्री अधिक 22 रहा। हवा 1.9 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तरी-पूर्वी दिशा में चली। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सीताराम मिश्र के अनुसार अब बारिश होने के आसार नहीं हैं। टुकड़ों में बादलों की मौजूदगी रह सकती है। ऐसे में अधिकतम तापमान सामान्य रहने के साथ न्यूनतम में गिरावट आ सकती है।
धूप निकलने से मिली राहत पर किसानों का छलक रहा दर्द...
अमानीगंज। दो दिनों की बारिश के बाद शनिवार को धूप निकलने के बाद किसान कटी धान की फसल सुखाने और सहेजने में जुटे हैं। बारिश से हुए नुकसान से किसान परेशान हैं। हल्की धूप निकलते ही किसान अपने खेतों में पहुंच गए और कटी फसल को बाहर निकालकर सुखाने का इंतजाम करने में लग गए। जिन खेतों में जलभराव नहीं हुआ है, वहां किसान दिन भर अपनी कटी फसल को उलटने-पलटने में लगे रहे।
किसान सूर्यलाल, दर्शन कुमार व राम मनोरथ ने बताया कि बारिश से कटी फसल को काफी नुकसान हुआ है। पानी में डूबी कटी फसल में अंकुरण हो गया है। नंदौली गांव निवासी रामबरन, राम बहोरे व अशोक ने बताया कि बारिश से खड़ी और कटी दोनों फसलों को नुकसान हुआ है। तेज हवा के चलते जहां खेतों में खड़ी फसल गिरकर लोटपोट हो गई है तो वहीं कटी फसल में जमाव शुरू होने से भी काफी नुकसान हुआ है। मंझनपुर के किसान प्रहलाद ने बताया कि इस बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इससे सौ फीसदी नुकसान ही हुआ है। किसानों को सरकार से मदद की दरकार है।