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Ayodhya News: ऑक्सीजन लगाने की मिन्नतें करते रहे तीमारदार, महिला ने तोड़ा दम

Tue, 10 Feb 2026 09:00 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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2-जिला अस्पताल में महिला की मौत के बाद मेडिकल वार्ड में मौजूद चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी।-संवाद
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अयोध्या। जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती एक मरीज को ऑक्सीजन लगाने के लिए तीमारदार मिन्नतें करते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुना। इस दौरान महिला ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। इसके बाद आक्रोशित परिजनों ने वार्ड में दो घंटे तक हंगामा किया।
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गोंडा जिले के छपिया थाना क्षेत्र के तिरुखा बुजुर्ग, सुरवार खुर्द निवासी कौशल्या सिंह (60) को मंगलवार सुबह 10 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों के अनुसार उस समय उनके पेट व कमर में दर्द था। आरोप है कि मेडिकल वार्ड में इलाज शुरू होने के बाद उनकी सांस फूलने लगी। परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों से ऑक्सीजन लगाने की मांग की।
आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मियों ने ऑक्सीजन न होने की बात कही और सिलिंडर नहीं लगाया गया। हालत बिगड़ने पर फिजिशियन डॉ. प्रशांत द्विवेदी आए, जिन्होंने उनका मरीज न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। परिजनों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीज के बेटे पवन कुमार सिंह का कॉलर पकड़कर धकेल दिया। इसी दौरान दोपहर में लगभग 12:30 बजे महिला की मौत हो गई तो परिजनों ने वार्ड में हंगामा करना शुरू किया।
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नगर कोतवाल अश्विनी पांडेय ने परिजनों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन आरोपी चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। कार्रवाई होने तक वह शव ले जाने को राजी नहीं हुए। उधर, डॉ. प्रशांत द्विवेदी ने बताया कि महिला का इलाज किया जा रहा था। उस समय तक ऑक्सीजन स्तर ठीक था, इसलिए ऑक्सीजन देने की जरूरत नहीं थी। संभवत: ह्रदयाघात से महिला की मौत हुई है।

इनसेट
मौत के बाद लगाया इंजेक्शन
मृतका की बहू ने बताया कि पहले तो चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी इलाज के लिए नहीं सुन रहे थे, लेकिन मौत के बाद उन्होंने दो इंजेक्शन लगाया। सांस फूलने पर डॉक्टर को बुलाया गया। वह दवा लिखकर चले गए, लेकिन ऑक्सीजन नहीं लगाया। पूछने पर बताया कि इस वार्ड में ऑक्सीजन नहीं है। सभी डॉक्टर बोलते रहे कि उनका मरीज नहीं है। पवन कुमार सिंह ने बताया कि एक घंटे तक मिन्नत करने के बावजूद उनकी मां को ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं लगाया गया। इसमें चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों की घोर लापरवाही है। सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
इनसेट
बाहर से मंगाई तीन हजार की दवा
मृतका के बेटे अवधेश सिंह ने बताया कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद सरकारी इलाज के नाम पर सिर्फ ग्लूकोज ही लग सका। उन्हें तीन-चार बार बाहर से दवाएं लाने की पर्ची थमाई गई, जो लगभग तीन हजार रुपये की मिलीं। उन्होंने पर्चियां दिखाकर व्यवस्था पर सवाल उठाए।
वर्जन...
परिजन पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं हैं। पीएम रिपोर्ट के आधार पर मौत के सही कारणों की जानकारी मिल सकती है। मामले की जांच कराई जाएगी। इलाज में लापरवाही साबित होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. अजय चौधरी, अधीक्षक, जिला अस्पताल

2-जिला अस्पताल में महिला की मौत के बाद मेडिकल वार्ड में मौजूद चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी।-संवाद

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