अयोध्या। राम मंदिर में अगले एक पखवाड़े के भीतर चार बड़े उत्सव मनाने की तैयारी है। इसकी शुरुआत 25 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा से होगी। इस अवसर पर रात 12 बजे राम मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। रामलला की उत्सव मूर्ति को गर्भगृह से बाहर निकालकर मंदिर के उत्तरी हिस्से में खुले आसमान के नीचे विराजमान कराया जाएगा। यहां पूजन-अर्चन के बाद उन्हें खीर का भोग लगाया जाएगा।
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात आसमान से अमृत की वर्षा होती है। इसी आस्था के अनुरूप करीब डेढ़ क्विंटल खीर तैयार की जाएगी। अगले दिन इसे भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। 26 अक्तूबर को मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। सात नवंबर को हनुमान जयंती और दीपोत्सव के आयोजन की तैयारी है।
राम मंदिर के धार्मिक व्यवस्था प्रमुख आचार्य इंद्रदेव मिश्र ने बताया कि 26 अक्तूबर को शाम पांच बजे महर्षि वाल्मीकि जयंती का आयोजन होगा। इसमें साधु-संतों के साथ वाल्मीकि समाज के करीब 250 लोग शामिल होंगे। महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति का षोडशोपचार पूजन और अभिषेक किया जाएगा। साथ ही रामायण से जुड़े भजनों का गायन होगा।
कार्यक्रम की जिम्मेदारी राम मंदिर ट्रस्ट की ट्रस्टी डॉ. निर्मला यादव को सौंपी गई है। वह बुधवार को अयोध्या पहुंचीं और तैयारियों को लेकर बैठक की।
राम मंदिर में जलेंगे डेढ़ लाख दीपक, सजेगा परिसर :
आचार्य इंद्रदेव मिश्र ने बताया कि सात नवंबर को राम मंदिर में हनुमान जयंती और दीपोत्सव मनाने की तैयारी है। इसी दिन प्रदेश सरकार की ओर से राम की पैड़ी पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने की योजना है। राम मंदिर परिसर में भी करीब डेढ़ लाख दीपक जलाए जाएंगे। इस अवसर पर मंदिर परिसर के परकोटे में स्थित हनुमान मंदिर में विशेष आयोजन होगा। पूरे परिसर को फूलों और फसाड लाइटिंग से सजाया जाएगा। हनुमान जी को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाएगा।