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राम मंदिर निर्माण : आस्था, संघर्ष और सफलता की गाथा

Mon, 02 Jun 2025 11:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। राम दरबार की स्थापना की तैयारियों के बीच मंदिर निर्माण का कार्य पूर्णता की ओर है। राम मंदिर निर्माण की यात्रा भारत के इतिहास की एक लंबी, संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक कथा है। यह सफर आसान नहीं रहा। दशकों के कानूनी संघर्ष, सामाजिक आंदोलन और तकनीकी चुनौतियों को पार कर यह सपना साकार हो रहा है।
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राम मंदिर निर्माण का आधार 500 वर्षों से अधिक पुराने विवाद पर टिका है। वर्षों तक यह मामला अदालतों में चलता रहा। अंततः नौ नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया। इससे विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने फरवरी 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया, जिसे मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। राम मंदिर के निर्माण का शुभारंभ पांच अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन कर किया।
इतिहासकार डॉ. हरिप्रसाद दुबे कहते हैं कि राम मंदिर निर्माण की यह यात्रा केवल ईंटों की कहानी नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा, तकनीकी दक्षता, और अडिग संकल्प का संगम है। जब यह मंदिर पूर्ण रूप से बनकर सामने आएगा, तो यह न केवल भगवान श्रीराम की उपासना का स्थान होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा भी रहेगा कि जब संकल्प अडिग हो, तो कोई बाधा स्थायी नहीं होती।
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मंदिर की नींव के लिए जब प्रारंभिक टेस्ट पाइलिंग की गई, तो वह तकनीकी रूप से विफल सिद्ध हुई। इंजीनियरों ने पाइलिंग किए गए खंभों पर जब भूकंप जैसे झटके दिए तो खंभों में दरार आ गई। भूमि की स्थिति के कारण अपेक्षित मजबूती नहीं मिल पा रही थी। इसके चलते इंजीनियरों को पूरी नींव की डिजाइन फिर से बनानी पड़ी।

टेस्ट पाइलिंग फेल होने के बाद नींव की नई डिजाइन तैयार कराई गई। इसमें छह महीने लग गए नई नींव में आरसीसी (रोलर कंपैक्ट कंक्रीट) का उपयोग किया गया। इसके तहत 50 फीट गहराई तक खोदाई कर उस पर पत्थरों की चट्टान डाली गई। इसके ऊपर 21 फीट ऊंचा फाउंडेशन बनाया गया। इसके बाद मंदिर निर्माण का काम प्रारंभ हुआ। नींव अब इस तरह तैयार की गई है कि यह हजारों वर्षों तक बिना क्षति के टिक सके।
- जैसे ही निर्माण की गति पकड़ने लगी, कोविड-19 महामारी ने देश को जकड़ लिया। लॉकडाउन, श्रमिकों की कमी और स्वास्थ्य नियमों के कारण राम मंदिर निर्माण का काम भी प्रभावित हुआ। काम की गति धीमी हो गई। फिर भी, एक भी दिन निर्माण पूर्णतः बंद नहीं हुआ, जो प्रतिबद्धता का परिचायक है।
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