अयोध्या। कुत्ता, बंदर या सियार के काटने के बाद हर मरीज को रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन की जरूरत नहीं होती। गंभीर और गहरे घाव यानी कैटेगरी-3 में ही इसे दिया जाता है। यह जानकारी मंगलवार को शहर के उदया पब्लिक स्कूल में संचारी रोग नियंत्रण अभियान और विश्व हेपेटाइटिस दिवस के तहत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में दी गई।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को संक्रामक बीमारियों के लक्षण, जांच और बचाव के बारे में जानकारी दी। एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद श्रीवास्तव ने विश्व हेपेटाइटिस दिवस के तहत हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई के संक्रमण, लक्षण, जांच और इससे होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में बताया। उन्होंने रेबीज वायरस के संक्रमण और डॉग बाइट की विभिन्न श्रेणियों की भी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कुत्ते, बंदर, सियार के काटने के बाद घाव की प्रकृति के अनुसार उपचार जरूरी है। कैटेगरी-3 के गहरे घाव वाले मरीजों को रेबीज वैक्सीन के साथ रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन की जरूरत पड़ती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर रेबीज जानलेवा हो सकता है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संदीप शुक्ला ने छात्र-छात्राओं को टीबी के लक्षण, जांच और बचाव की जानकारी दी। उन्होंने तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। जिला मलेरिया अधिकारी मंजुला आनंद ने डेंगू और मलेरिया के लक्षण और बचाव के तरीके बताए। डॉ. दीपिका चंद्रा ने संक्रामक रोगों, डेंगू, मलेरिया, जापानी इंसेफेलाइटिस और हेपेटाइटिस से बचाव के उपाय बताए। इस मौके पर दीपक पांडेय, अजीत सिंह, डिप्टी डीएचआईओ डीपी सिंह, प्रतिष्ठा शर्मा, सीनियर मैनेजर जीवेंद्र सिंह, निधि सिन्हा आदि मौजूद रहे।