अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में आने वाले समय में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस विषय विशेषज्ञों का विकल्प बन सकेंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस समय विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में गैर-विषय विशेषज्ञों की समन्वयक के पद पर भी तैनाती है।
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस एक नई पहल है। इसके तहत अनुभवी पेशेवर, जिनके पास पीएचडी या नेट जैसी अकादमिक योग्यताएं नहीं होतीं, वह अपने व्यावहारिक अनुभव के आधार पर विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं को पढ़ा सकते हैं। इससे उद्योग और शिक्षा के बीच जुड़ाव बढ़ सकेगा। यह यूजीसी की नई शिक्षा नीति का हिस्सा है। ये नियुक्तियां अनुबंध पर अस्थायी तौर पर की जा सकेंगी।
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस वह व्यक्ति होंगे, जो किसी क्षेत्र (जैसे इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, मीडिया, साहित्य, कला, चिकित्सा आदि) में 15 से ज्यादा वर्षों का अनुभव रखते हैं, लेकिन पारंपरिक शिक्षक नहीं होते हैं। इस नई व्यवस्था के माध्यम से उद्योग के विशेषज्ञों को शिक्षा के क्षेत्र में लाया जा सकेगा। इनकी ओर से विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया का ज्ञान और कौशल प्रदान किया जाएगा, जिससे वह उद्योग की जरूरतों के लिए बेहतर तौर पर तैयार हो सकेंगे।
इन विशेषज्ञों को पीएचडी या नेट की आवश्यकता से छूट दी जाएगी। अनुभव को प्राथमिकता दी जाएगी। यह नियुक्तियां अनुबंध पर निश्चित अवधि एक से तीन साल तक के लिए हो सकेंगी और प्रदर्शन के आधार पर इसे विस्तार दिया जा सकता है। इस प्रक्रिया के प्रभावी होने के बाद छात्र-छात्राएं कक्षा में ही उद्योग के वास्तविक परिपेक्ष्य के साथ व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे। कुलसचिव विनय कुमार सिंह के अनुसार प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति के प्रस्ताव को कार्य परिषद में स्वीकृति मिल चुकी है। इस व्यवस्था के प्रभावी होने से युवाओं को रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने में मदद के साथ उद्योग और विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक विभागों के बीच सहयोग को मजबूती मिलेगी।