तारुन। तमसा जीवनदायिनी रही है। तट पर पिंड दान होता था। मेला लगता था। सदानीरा थी। अब उथली हो गई। तट का राम चौरा, राम कुंड अतीत की बात हो गई। स्नान के लिए पानी नहीं। जहांं है वहांं गंदगी और जलकुंभी है। तमसा तिल तिल मर रही है।
भगवान श्री राम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ यहीं राम चौरा के आसपास पहली रात बिताई थी। यह उसका निशान स्थल है। नदी करीब और गहरी थी। अब राम चौरा से गौराघाट के बीच दृश्य बदल गया है। चार साल पहले हुई खोदाई भी काम नहीं आ रही है। राम चौरा के पास नदी के साथ राम कुंड था। अब वहां पानी नहीं दिखता। नदी ऐसी उथली हुई कि फसलों के बीच गुम सी हो गई। कुछ दूर पर गौरा घाट है। घाट पर केवल दो फिट पानी है। स्नान नहीं हो सकता। जलकुंभी फैली है। दुर्दशा देख लोगों का मन खिन्न हो जाता है। कहते हैं कि यह पानी भी कम्हरिया घाट नहर से आया।
गयासपुर की प्रधान शकुंतला यादव कहती हैं कि स्थान के सुंदरीकरण के लिए 1.19 करोड़ रुपये से पर्यटन विभाग काम करवा रहा है। लेकिन नदी के जलकुंभी की सफाई, घाट पर गहराई, सुंदरीकरण, स्वच्छ पानी के लिए पंप जैसे काम कराए जाने चाहिए।
कहते हैं लोग...
हम लोग पहले यहां पर नाव चलाया करते थे। तीन नाव लगती थी दयाराम, शाह, दुर्गा राम निषाद मेरे साथ नाव चलाते थे। यह लोग अब नहीं है। इतना पानी था कि पूरा मंदिर तक पानी भरा रहता था। धीरे-धीरे तमसा हम लोगों से रूठ सी गई।
-देवी दीन, निवासी सकतपुर
रामचौरा के बगल सटी राम कुंड लगभग एक से डेढ़ बीघा में स्थित है। वहां से 50 मीटर की दूर तमसा के तट पर हम लोग बचपन में अपने बाबा के साथ आते थे। पितृ पक्ष में यहां पिंडदान व पित्रों को पानी दिया जाता था। नदी में स्नान होता था। लेकिन अब छोटे से स्थान पर रामकुंड को समेट दिया गया। लोगों ने जमीन को कब्जे में कर लिया। खेती-बाड़ी कर रहे हैं।
-राघवराम, निवासी तारडीह
रामचौरा तमसा नदी से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। नदी के तट पर सरकारी जमीन है। यहां से रामचौरा का क्षेत्रफल विकसित करके श्री राम के प्रथम रात्रि निवास स्थल का विकास किया जाना चाहिए।
-हरिश्चंद्र निषाद, जिला पंचायत सदस्य
तमसा के बारे में अपने बाबा से सुनता था कि यह नदी आसपास के गांवों के लिए वरदान थी। इसके पानी से खेती बाड़ी, जानवरों के लिए पानी इसी से मिलता था। लेकिन अब नदी दिखती ही नहीं।
-गया प्रसाद निषाद, निवासी रामदासपुर