अयोध्या। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध की चिंगारी जनपद के कई क्षेत्रों में पहुंच चुकी है। मंगलवार को अखिल भारतीय चाणक्य परिषद, पत्रकार संगठन, सवर्ण युवाओं ने विरोध जताते हुए नए नियम को वापस लेने की मांग की है।
पूरा बाजार बाजार प्रतिनिधि के मुताबिक अखिल भारतीय चाणक्य परिषद ने विरोध में मंगलवार को बैठक की। परिषद के पदाधिकारियों एवं शिक्षाविदों ने एक स्वर में इन नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार एवं यूजीसी से इन विनियमों पर पुनर्विचार करने की अपील की गई। चेतावनी दी कि यदि इन नियमों को वापस नहीं लिया गया तो संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। बैठक में परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत ओम प्रकाश मिश्रा, राष्ट्रीय महामंत्री आचार्य राधेश्याम मिश्रा समेत अनेक पदाधिकारी, शिक्षक, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मिल्कीपुर प्रतिनिधि के मुताबिक भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंगठन के तत्वावधान में तहसील परिसर मिल्कीपुर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सुधीर कुमार को दिया गया। यूजीसी की नई नीतियों को शिक्षा की स्वायत्तता, गुणवत्ता और समान अवसरों के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए इन पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की गई है। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गई कि यूजीसी की विवादित नीतियों पर रोक लगाते हुए व्यापक विमर्श के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए, जिससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समानता और स्वायत्तता सुरक्षित रह सके।
हैदरगंज बाजार प्रतिनिधि के अनुसार मंगलवार को धोबना चौराहे पर सवर्ण युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में कागज के टुकड़ों पर लिखे विरोध संदेश लेकर आक्रोश जताया। प्रदर्शन का नेतृत्व उपेंद्र दुबे ने किया। इस दौरान गुड्डू दुबे, नीरज चतुर्वेदी, मनोज दुबे, बृजेश तिवारी, अभय तिवारी, अरुण दुबे, शंभू नाथ उपाध्याय, प्रांशु पांडे, सूरज पांडे सहित कई लोग उपस्थित रहे। विरोध प्रदर्शन के उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर नियमों को वापस लेने की मांग की।
जाना बाजार प्रतिनिधि के मुताबिक यूजीसी के विरोध में मंगलवार को आक्रोशित लोगों ने रैली निकालकर बिल की प्रतियां जलायीं। पीएम और गृहमंत्री के विरोध में नारे लगाए। राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्री मांग पत्र एसडीएम बीकापुर को दिया। आंदोलन के दौरान जहां आधे दर्जन भाजपा पदाधिकारियों ने पद से इस्तीफा दिया तो वहीं कई बड़े पदाधिकारी किनारा कस लिए।