अयोध्या। पांच जुलाई 2005 को हुए आतंकी हमले को भले ही दो दशक बीत रहे हों, लेकिन वो दिन रामनगरी की स्मृति में आज भी जीवित है। हालांकि इस साल की बरसी पर शहर का माहौल कुछ और ही संदेश दे गया। डर नहीं, उत्सव था, सन्नाटा नहीं, श्रद्धालुओं की गूंज थी। सुरक्षा घेरे जरूर थे, पर श्रद्धा की रफ्तार को न कोई रोक पाया, न थाम सका। वीकेंड के चलते अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
आतंकी हमले की 20वीं बरसी पर अक्सर सुरक्षा को लेकर तीव्र सतर्कता देखी जाती है। इस बार भी प्रशासन की ओर से चाक-चौबंद व्यवस्था रही, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में कहीं कोई भय नहीं दिखा। न स्थानीय नागरिकों के चेहरे पर चिंता थी और न ही बाहर से आए भक्तों के कदम रुके। पूरे शहर में उत्सव का माहौल था। राम की पैड़ी से लेकर हनुमानगढ़ी तक भजन-कीर्तन गूंजते रहे। रामभक्तों की टोलियों ने ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा। दुकानों पर रौनक रही, फूल, प्रसाद, झंडे और रामलला की फोटो की बिक्री तेज रही।
मंदिर परिसर और संवेदनशील स्थलों पर विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती रही, लेकिन यह व्यवस्था किसी भी तरह से दर्शन या उत्सव के प्रवाह में अवरोध नहीं बनी। न डंडों का भय था, न प्रतिबंधों का बोझ, श्रद्धालुओं ने प्रशासनिक सहयोग की सराहना की। पूरी अयोध्या में कड़ी निगरानी की जाती रही। सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी ने बताया कि अयोध्या के प्रवेश मार्गों पर चेकिंग अभियान चलाया गया। प्रमुख मंदिरों के इर्द-गिर्द सादे वर्दी में पुलिस की टीम निगरानी कर रही है।