अयोध्या। नगर निगम को विधानसभा की लोक लेखा समिति से बड़ी राहत मिली है। 1.38 करोड़ रुपये की ऑडिट आपत्ति का निस्तारण हो गया है। वर्ष 2018-19 के बकाया जल कर पर विधानसभा की लोक लेखा समिति में प्रकरण विचाराधीन था। इसके लिए समिति के सामने नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार पेश हुए।
विधानसभा की लोक लेखा समिति एक वित्तीय समिति है, जो विधानमंडल के खर्चों पर नियंत्रण रखती है। खासकर सरकारी वित्तीय लेखों और विनियोग लेखों पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट की जांच करती है। यह समिति यह सुनिश्चित करती है कि सरकार की ओर से प्राप्त धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ठीक से किया गया है। समिति में विधानमंडल के सदस्य होते हैं, जिन्हें अध्यक्ष की ओर से चुना जाता है, और इनका कार्यकाल एक वर्ष का होता है।
इस समिति के सदस्य अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्त भी हैं। उन्हीं के प्रयास से अयोध्या नगर निगम को इस मामले में बड़ी राहत मिली है। 1.38 करोड़ की ऑडिट आपत्ति के मामले में समिति ने नगर आयुक्त को तलब किया था। नगर आयुक्त ने समिति के सदस्यों के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि कई नगर निगमों में जल कर लिया जाता है। वर्ष 2023 में अयोध्या में नगर निगम बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव पास नहीं हुआ।
नगर आयुक्त की ओर से समिति को साक्ष्यों के साथ बताया गया कि नगर निगम को इस धनराशि का कोई नुकसान नहीं हुआ है। उनके तर्कों से सहमत होते हुए समिति ने सर्वसम्मति से माना कि राजस्व क्षति नहीं हुई है। नगर आयुक्त ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि इसी के आधार पर विधानसभा की लोक लेखा समिति ने नगर निगम की ऑडिट आपत्ति को निस्तारित कर दिया है।