कृषि प्रक्षेत्र का निरीक्षण करते कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह व अन्य।
कुमारगंज। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में अब मेघालय के हल्दी की खेती की जाएगी। इसमें करक्यूमिन की मात्रा अधिक होती है। इसमें कैंसर को रोकने की क्षमता अधिक होती है। अभी यहां प्राकृतिक तरीके से हल्दी की खेती होती है। कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने प्राकृतिक हल्दी व सूरन की खेती के अवलोकन के दौरान यह हिदायत दी।
कुलपति ने शुक्रवार को परिसर का दौरा किया। उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) मॉडल को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे किसान कम खर्च में अधिक उत्पादन और मुनाफा हासिल कर सकेंगे। इससे वे आत्मनिर्भर भी बन पाएंगे। इस मॉडल को सभी कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) पर प्रभावी बनाया जाए।
उन्होंने एनएसपी-6 और डेयरी प्रक्षेत्र का भ्रमण कर कार्य प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने गायों को गुड़ और मछलियों को दाने भी खिलाए। कुलपति ने प्रसार निदेशालय के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने पशुओं के नस्ल, रख-रखाव और संख्या पर चर्चा की। इस मौके पर निदेशक प्रसार डॉ. रामबटुक सिंह, वरिष्ठ प्रसार अधिकारी डॉ. केएम सिंह, संयुक्त निदेशक एनएसपी-6 डॉ. एसपी सिंह, सह प्राध्यापक डॉ. महेंद्र सिंह, पर्यवेक्षक अजय सिंह मौजूद रहे।
प्राकृतिक खेती के बढ़ावा पर जोर
कुलपति ने विश्वविद्यालय परिसर और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने केवीके के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया। इससे किसानों का प्राकृतिक खेती की ओर झुकाव बढ़ेगा। कुलपति ने अधिकारियों के साथ सीड हब, सीड बैंक और सामुदायिक सीड बैंक पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले बीज पहुंचाना है।