अयोध्या। मेडिकल काॅलेज के ट्राॅमा सेंटर में शनिवार देर रात हुए विवाद के बाद जूनियर डॉक्टर आक्रोशित हो गए। एक बाहरी व्यक्ति और वार्डबॉय के खिलाफ कार्रवाई की मांग लेकर उन्होंने हड़ताल का एलान किया। इससे इमरजेंसी सेवाएं बाधित होने लगीं तो उच्चाधिकारी मौके पर आए। समझा-बुझाकर चिकित्सकों को शांत कराया गया। हालांकि, हंगामे के बीच करीब एक घंटे तक इलाज ठप होने से मरीज व तीमारदार परेशान रहे।
जिले के ज्ञानापुर निवासी जुग्गीलाल निषाद (65) को पेशाब में दिक्कत होने से परिजन रात 10:50 बजे मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में भर्ती कराया। इलाज के दौरान मरीज को लगाने के बाद वही सुई जूनियर डॉक्टर डॉ. अभिषेक के हाथ में चुभ गई। मानकों के अनुसार डॉक्टर ने मरीज की एचआईवी, हेपेटाइटिस आदि जांच कराने की सलाह दी। रात लगभग एक बजे सैंपल लेकर परिजन काउंटर पर गए, जहां उन्हें सुबह तक रिपोर्ट मिलने की जानकारी दी गई।
परिजन वापस आए और बाहर से जांच कराने की बात कही। निजी केंद्र पर इसके लिए 900 रुपये मांगे गए तो उनके साथ मौजूद सोनू नामक एक युवक ट्रॉमा सेंटर में आकर विवाद करने लगा। इसमें कॉलेज का एक वार्डबॉय उमेश तिवारी भी शामिल रहा। दोनों ने काफी देर तक हंगामा किया। इससे आक्रोशित चिकित्सकों ने इलाज करने से इंकार कर दिया। रात लगभग डेढ़ बजे से यह हंगामा दो घंटे तक चला। भोर में 04:03 बजे बजे जूनियर डॉक्टरों ने कॉलेज से जुड़े व्हाट्सअप ग्रुप में एक संदेश डाला और समस्याओं का समाधान होने तक मरीजों को देखने में असमर्थता जताई।
ट्राॅमा इंचार्ज डॉ. विनोद आर्या सुबह लगभग सात बजे मौके पर आए और नाराज चिकित्सकों को समझा-बुझाकर शांत कराया। चिकित्सक सोनू और वार्डबॉय उमेश तिवारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। चिकित्सकों का कहना था कि सोनू वार्डबॉय की मिलीभगत से दलाली करता है। बार-बार निपट लेने व ड्यूटी न करने देने की धमकी देता है। सोशल मीडिया पर भी उन लोगों ने भड़काऊ पोस्ट वायरल की है। वार्डबॉय अक्सर ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है और मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करने में बाधा डालता है।
प्राचार्य डाॅ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवाजीत शर्मा ने मौके पर जाकर जांच की थी। उनकी संस्तुति पर वार्डबॉय को वहां से हटा दिया गया है। डॉ. देवाजीत, डॉ. विनोद आर्या और डॉ. वीरेंद्र वर्मा को मामले की जांच करके सोमवार तक आख्या देने को कहा गया है। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सा सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं। मरीजों का इलाज किया गया है।