डॉ. प्रगति जैन को महावीराचार्य पुरस्कार प्रदान करते रवींद्रकीर्ति स्वामी।
अयोध्या। विद्वत महासंघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और शोध की सशक्त परंपरा का वाहक है। विद्वानों का दायित्व है कि वे जैन दर्शन के सिद्धांतों को समाज तक सरल और प्रभावी ढंग से पहुंचाएं, जिससे नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे। ये बातें जैन मंदिर रायगंज के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहीं। वह मंदिर में आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत जैन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
सम्मेलन के अंतर्गत शुक्रवार को महावीराचार्य पुरस्कार समर्पण समारोह एवं तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत महासंघ के चुनाव हुए। दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान के सहयोग से महावीराचार्य पुरस्कार प्रदान किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. नीलेश कुमार जैन (आईआईटी इंदौर) ने की, जबकि मुख्य अतिथि प्रो. राजीव जैन (पूर्व कुलपति, जयपुर) रहे। गणित के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. प्रगति जैन (इंदौर) को महावीराचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. प्रगति जैन ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए संस्था के प्रति आभार जताया और इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया। डॉ. अनुपम जैन ने पुरस्कार की महत्ता और इसकी पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। प्रो. सरोज जैन (बीना) को चंदारानी जैन स्मृति विद्वत महासंघ पुरस्कार-2026 और युवा विद्वान डॉ. संजीव जैन सराफ (वाराणसी) को प्रो. चंद्रवीर जैन स्मृति विद्वत महासंघ पुरस्कार-2026 प्रदान किया गया। सायंकालीन सत्र में भक्ति कार्यक्रम एवं विद्वानों की ओर से शोध आलेखों का वाचन भी हुआ। इस दौरान आर्यिका चंदनामती, डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन, सुरेंद्र जैन, मनोज जैन, आदेश जैन सहित अन्य मौजूद रहे।
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डॉ. अनुपम अध्यक्ष और विजय कुमार बने राष्ट्रीय महामंत्री
महासंघ के महामंत्री विजय कुमार जैन ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्था की स्थापना छह अक्तूबर 1998 को गणिनी आर्यिका ज्ञानमती के सानिध्य में जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर में हुई थी। वर्तमान में यह संस्था देश-विदेश के 346 से अधिक विद्वानों का प्रमुख मंच है। चुनाव प्रक्रिया में डॉ. अनुपम जैन (इंदौर) को पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष और विजय कुमार जैन को राष्ट्रीय महामंत्री सर्वसम्मति से चुना गया। दोनों पदाधिकारियों का मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने तिलक व पगड़ी पहनाकर सम्मान किया।