अयोध्या। राम मंदिर में साधु-संतों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था लागू करने को लेकर मंथन तेज हो गया है। प्रस्ताव है कि संतों के लिए दर्शन मार्ग में एक लेन आरक्षित की जाए, जहां आधार कार्ड दिखाकर उनकी पहचान सत्यापित की जा सके और उन्हें वीआईपी दर्शन की सुविधा मिल सके। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, पहचान सत्यापन और प्रस्तावित व्यवस्था के संभावित दुरुपयोग जैसे पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पर्व, विशेष आयोजनों और छुट्टियों के दौरान भीड़ बढ़ने से दर्शनार्थियों की कतारों और सुरक्षा प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। प्रस्तावित व्यवस्था में सबसे अहम सवाल यह है कि आधार कार्ड के आधार पर दर्शन की सुविधा किन संतों को दी जाएगी और उनकी पहचान का सत्यापन किस तरह होगा। केवल आधार कार्ड से किसी व्यक्ति की साधु-संत के रूप में पहचान सुनिश्चित नहीं होती। ऐसे में स्थानीय संतों की प्रमाणित सूची तैयार करने, मठ-मंदिर या अखाड़े से जुड़े होने की पुष्टि करने और प्रवेश के लिए स्पष्ट मानक तय करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। आगामी दो दिसंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में इस पर निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।
प्रभावी सत्यापन व्यवस्था बनाने की योजना
राम मंदिर ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा के लिहाज से भी अलग लेन बनाने के प्रस्ताव का आकलन करना जरूरी होगा। मंदिर परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा जांच, भीड़ का दबाव, कतारों का संचालन और प्रतिबंधित क्षेत्रों तक पहुंच पर नियंत्रण प्रमुख पहलू हैं। यदि आधार कार्ड के आधार पर सीधे प्रवेश की सुविधा दी जाती है, तो पहचान-पत्र के दुरुपयोग, दूसरे व्यक्ति के दस्तावेज के इस्तेमाल और निर्धारित पात्रता से बाहर के लोगों के प्रवेश की आशंका को रोकने के लिए प्रभावी सत्यापन व्यवस्था बनानी होगी।