श्रीराम जन्मभूमि परिसर की ओर जा रही वाहनों की जांच करते पुलिसकर्मी।
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अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर पर हुए फिदायीन आतंकी हमले की आज 21वीं बरसी पर अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह हाई अलर्ट पर रही। रामनगरी अपनी रौ में रही, श्रद्धालु रोज की तरह मठ-मंदिरेां में दर्शन-पूजन बिना किसी रोकटोक के करते रहे। कई श्रद्धालुओं को तो आतंकी हमले की बरसी के बारे में जानकारी भी नहीं थी। वहीं राम मंदिर परिसर और आसपास के पूरे रेड ज़ोन में सुरक्षा एजेंसियां विशेष रूप से सतर्क रहीं।
मंदिर के सभी प्रवेश द्वारों पर श्रद्धालुओं की सघन जांच की गई तथा बैरिकेडिंग और सुरक्षा निगरानी को और कड़ा किया गया। पांच जुलाई 2005 को आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े छह आतंकवादी विस्फोटकों से भरी जीप से बैरिकेडिंग तोड़कर राम जन्मभूमि परिसर में घुस आए थे। उनका उद्देश्य अस्थायी रामलला मंदिर को निशाना बनाना था। हालांकि, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई करते हुए सभी छह आतंकवादियों को मार गिराया था। इस हमले में दो स्थानीय नागरिकों की मौत हुई थी, जबकि सीआरपीएफ के सात जवान घायल हुए थे।
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इस मामले में जून 2019 में प्रयागराज की विशेष अदालत ने फैसला सुनाते हुए साजिश में शामिल चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था। आतंकी हमले के बाद राम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए। आज भी राम मंदिर देश के सबसे सुरक्षित धार्मिक स्थलों में शामिल है और बरसी के मद्देनज़र सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बनाए रखी।