अयोध्या। साल 2019 का नौ नवंबर ऐतिहासिक दिन था। इसी दिन मंदिर-मस्जिद विवाद के पटाक्षेप के साथ उपेक्षित अयोध्या के एक कांड का अवसान हुआ। इसी दिन सदियों से बदहाली का दंश झेल रही अयोध्या के विकास रूपी सुंदरकांड की भी शुरुआत हुई। अनुकूल माहौल मिलने पर यहां कारोबार को पंख लगने लगे। व्यापारियों ने अपने साथ सरकारी खजाना भी खूब भरा। पांच साल में जीएसटी कलेक्शन 384 करोड़ से बढ़कर 1333 करोड़ हो गया।
पांच सदी से अयोध्या की पहचान विवादों की नगरी के रूप में होती थी। इससे यहां लोग कारोबार के लिए भी आगे नहीं आते थे। इसका असर अयोध्या के साथ ही देवीपाटन मंडल पर भी पड़ता था। आये दिन अयोध्या व आसपास के मंडल की सीमा सील होती थी, जिनसे कारोबार प्रभावित होता था। इससे आजिज आकर नया कारोबार शुरू करने व बढ़ाने में लोगों की दिलचस्पी नहीं थी। पांच अगस्त, 2020 को मंदिर निर्माण शुरू हुआ तो अयोध्या समेत आसपास के जिलों में कारोबार खिलखिलाने लगा और अयोध्या एक सशक्त नगरी के रूप में उभरने लगी। स्टेट जीएसटी के आंकड़े विकास की यही दास्तां बयां कर रहे हैं।
वर्ष 2017-18 में अयोध्या जोन के नौ जिले में महज 34,752 व्यापारी पंजीकृत थे, जो 384.50 करोड़ जीएसटी जमा करते थे। वर्ष 2019-20 में 42,029 व्यापारियों ने पंजीकरण कराया और 928 करोड़ राजस्व जमा किया। इसके बाद तो साल-दर-साल तीव्र वेग से कारोबार बढ़ने लगा और राजकोष को संजीवनी मिलती रही। मौजूदा समय में यहां 69,656 कारोबारी पंजीकृत हैं, जिन्होंने अब तक 1333.28 करोड़ जीएसटी जमा की है।
माफियाराज से भयभीत रहते थे व्यापारी
पूर्वांचल में अपराध का ग्राफ भी अधिक रहता था। सत्ता में आते ही योगी सरकार ने माफिया की कमर तोड़ना शुरू किया तो व्यापारियों का भी मनोबल ऊंचा हुआ। मंदिर के साथ ही कारोबार के लिए अनुकूल माहौल भी इसका प्रमुख कारण माना जा सकता है।
192 परियोजनाओं से और मिलेगी मजबूती
19 फरवरी को हुए भूमिपूजन समारोह में जिले में 192 नई परियोजनाओं की नींव रखी गई है। इनके धरातल पर उतरते ही रोजगार बढ़ने के साथ ही राजस्व भी बढ़ेगा।
वर्ष 2017-18 में प्रदेश के राजस्व संग्रह में अयोध्या जोन का 1.79 प्रतिशत हिस्सा रहता था, जो कि अब बढ़कर 2.81 प्रतिशत हो गया है। यह निश्चित तौर से कारोबार बढ़ने का असर है। अभी यह रफ्तार और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
-आरएस विद्यार्थी, अपर आयुक्त ग्रेड-1/2, अयोध्या जोन