छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुए ढांचा ध्वंस प्रकरण में शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय स्थित विशेष कोर्ट में सुनवाई हुई।
सीबीआई के 43वें गवाह रिटायर्ड सीएमओ डॉ. गोपाल भूषण ने मुख्य परीक्षा में बताया कि छह दिसंबर 1992 को उसकी ड्यूटी विवादित स्थल के गर्भगृह में लगी थी।
उसने देखा था कि काफी लोग गुंबदों पर कुदाल व रॉड लेकर चढ़े थे। वे उसे खोदकर गिरा रहे थे। मुख्य परीक्षा पूरी होने पर विशेष मजिस्ट्रेट गोपाल तिवारी ने बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की जिरह के लिए 26 अक्तूबर को तारीख तय कर दी।
अभियोजन पक्ष सीबीआई ने 43वें गवाह के रूप में रिटायर्ड सीएमओ डॉ. गोपाल भूषण को पेश किया। गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा (इग्जामिनेशन इन चीफ) में बताया कि वह घटना के समय सीआरपीएफ की 76वीं बटालियन में बतौर डॉक्टर तैनात था।
गवाह ने बताया कि छह दिसंबर को वह सुबह 7:30 बजे अपनी ड्यूटी पर पहुंच गया था। दोपहर करीब 12 बजे पहले ढांचे के पीछे से और इसके बाद में चारों तरफ से पत्थर फेंके जाने लगे। हल्के लाठीचार्ज के बावजूद मौजूद भीड़ पर कोई असर नहीं पड़ा। ईंट, पत्थरों से जवानों को चोटें आईं थीं।
गवाह ने बताया कि उसने सीता रसोई में घायल जवानों का इलाज किया था। वहां भाषण हो रहा था लेकिन शोरगुल अधिक होने से आवाज स्पष्ट नहीं आ रही थी।
गवाह ने बताया कि उसने गुंबदों पर काफी लोगों को कुदाल व राड लेकर चढ़ते हुए देखा था। वे खोद रहे थे व गिरा रहे थे। गवाह से मुख्य परीक्षा पूरी होने पर विशेष कोर्ट ने अगली तारीख तय कर दी।