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Auraiya News: टैक्सी परमिट का क्या काम...जब कार पर लिखा अफसर का नाम

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टैक्सी परमिट का क्या काम...जब कार पर लिखा अफसर का नाम
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औरैया। जिन अफसरों के हाथों में शासन के नियमों को पालन कराने का जिम्मा है वह ही नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। मुख्य विकास अधिकारी से लेकर सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय और विद्युत निगम के अधिकारी नियम विरुद्ध तरीके से निजी वाहनों को अनुबंधित कर दौड़ा रहे हैं। इससे हर साल परिवहन विभाग को प्रति वाहन 23 हजार से अधिक का नुकसान हो रहा है।
जिन विभागों के पास सरकारी गाड़ी नहीं है, वे टेंडर के माध्यम से वाहनों को अनुबंधित करते हैं। इसके लिए उन्होंने 20 हजार रुपये से लेकर 35 हजार रुपये तक का भुगतान प्रतिमाह किया जाता है। ये भुगतान गाड़ी की कीमत पर निर्भर करता है। नियमानुसार, अनुबंधित गाड़ी टैक्सी परमिट होना अनिवार्य है। लेकिन अफसरों की मिलीभगत के चलते जिले में दो दर्जन से अधिक निजी वाहन अधिकारियों ने अनुबंधित कर रखे हैं। इसमें जिले के कई बड़े अफसर भी शामिल हैं।
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निजी वाहनों का टैक्सी के रूप में उपयोग करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी एआरटीओ की है। लेकिन, उनकी क्या मजाल के वह बड़े अफसरों के यहां अनुबंधित गाड़ी पर कार्रवाई कर पाएं। कलक्ट्रेट से लेकर विकास भवन और अन्य सरकारी कार्यालयाें में अनुबंधित निजी गाड़ियां दिन भर नजर आतीं हैं लेकिन जिम्मेदार इस पर आंखें मूंद लेते हैं।
केस एक:
मुख्य विकास अधिकारी के लिए इनोवा क्रिस्टा कार यूपी 79 एडी 4344 अनुबंधित की गई है। बाकायदा कार पर सीडीओ लिखा है और बत्ती भी लगी है। यह वाहन निजी वाहन के तौर पर एआरटीओ कार्यालय में ध्यान सिंह निवासी हरवंशपुर जिला औरैया के नाम पंजीकृत है।
केस दो: सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय के लिए बोलेरो कार यूपी 79 एए 4051 अनुबंधित है। इस कार पर भी उत्तर प्रदेश सरकार और सहायक आयुक्त खाद्य लिखा है। यह कार औरैया के रानीपुर निवासी अश्वनि कुमार के नाम निजी वाहन के तौर पर पंजीकृत है।
केस तीन:
विद्युत निगम के शहरी खंड के उप खंड अधिकारी प्रथम ने भी बोलेरो कार यूपी 79 एएफ 4460 अनुबंधित है। कार पर एसडीओ की प्लेट भी लगी है। यह कार भी निजी वाहन के रूप में एआरटीओ कार्यालय में सुशील कुमार निवासी निगड़ा जोगीपुर के नाम पंजीकृत है।
परिवहन विभाग की ओर से सात सीटर टैक्सी परमिट वाहन को प्रतिवर्ष 23760 रुपये प्रतिवर्ष चार किस्तों में प्रति तिमाही जमा करना होता है। ऐसे में अगर जिले की बात करें तो यहां दो दर्जन से अधिक निजी वाहनों का सरकारी कार्यालयों में अनुबंध होने के चलते परिवहन विभाग को लाखों का नुकसान हो रहा है। वाहन स्वामी अधिकारियों की शह पर टैक्स की चोरी कर रहे हैं। एआरटीओ एनसी शर्मा ने बताया निजी वाहनों का टैक्सी के रूप में उपयोग किए जाने पर वाहन खरीद से लेकर अब तक बने टैक्स का छह गुना जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। ऐसे में अगर कार्रवाई हो तो अनुबंधित किए गए एक-एक निजी वाहन पर ही लाखों का टैक्स बनेगा।
निजी वाहन का टैक्सी के तौर पर प्रयोग करना या अनुबंध करना नियम विरुद्ध है। ऐसे वाहनों को चिह्नित कर वाहन स्वामी को नोटिस जारी किया जाएगा। उनसे नियमानुसार जुर्माना वसूल करने की कार्रवाई की जाएगी।
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-एनसी शर्मा, एआरटीओ।
-वाहन का अनुबंध करने के लिए जारी टेंडर में यह शर्त रखी गई थी टैक्सी परमिट वाहन ही उपलब्ध कराना है। वाहन स्वामी से इस बारे में पूछा जाएगा। अगर टैक्सी परमिट नहीं है तो अनुबंध खत्म कर दूसरे वाहन का अनुबंध किया जाएगा।
-संत कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
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