रोग से खराब हुआ बैंगन व पत्तियों पर लगा धब्बा।
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मौसम के बदले मिजाज और कीटों की मार से सब्जी उत्पादक किसान परेशान हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी किसान बैंगन की फसल को बचा नहीं पा रहे हैं। बैंगन में धब्बा रोग से फसल को खासा नुकसान हो रहा है।
बीहड़ी क्षेत्र में बैंगन का उत्पादन अधिक होता है। नदियों का किनारा होने से इलाके में सब्जियों की फसल खूब होती है। इस बार मौसम के बदलने से सब्जियों में धब्बा रोग लग रहा है। इसका सबसे अधिक असर बैंगन पर है। बैंगन की खेती इस रोग से बर्बाद हो रही है। क्षेत्र के राउपुर, चांवरपुर, अटसू, चिटकापुर, महाराजपुर के किसानों का कहना है कि इस बीमारी से रोजाना एक एकड़ में लगभग 15 से 20 किलो बैंगन खराब हो रहा है। ऐसे में किसानों को तगड़ा नुकसान होगा। रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल के बाद भी वह फसल को बचा नहीं पा रहे हैं।
क्या है धब्बा रोग
बैंगन के पौधे में यह रोग फ ोमोप्सिम वेकसेस नाम के हानिकारक कवक से पैदा होता है। इससे पौधे की पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं। रोगी पत्तियां पीली पड़कर सूख जाती हैं। यह मृदाजनित रोग है। पौधे झुलस कर सूख जाते हैं। इस रोग से फ ल पर भी भूरे धब्बे बनने लगते हैं। यह धब्बे आपस में मिलकर फ ल को गलाना शुरू कर देते हैं। कुछ ही दिन में फ ल बेकार हो जाता है।
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ऐसे करें बचाव
बागवानी विशेषज्ञ बीएस विश्नोई का कहना है कि इस रोग की रोकथाम के लिए खरपतवार नियंत्रण के अलावा धब्बे वाली पत्तियों को तोड़कर जला देना चाहिए। वहीं कृषि वैज्ञानिक डा. गौरव पोरवाल का कहना है कि डाइथेन जेड .78 के घोल का सात या आठ दिन के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए। इससे रोग से राहत मिलेगी।