औरैया। डीएसओ, आबकारी व खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय के बाहर गंदगी, कीचड़ व जलभराव है। इससे इन दफ्तरों के बाहर व आसपास खड़ा होना तक मुश्किल है।
बगल में बसी कांशीराम कॉलोनी का हाल और ज्यादा बदतर है। बजबजाती नालियां और जलभराव के कारण यहां के लोग परेशान हैं। सितंबर 1997 में औरैया को जिला घोषित किया गया था। तब मिडिल स्कूल परिसर को कलक्ट्रेट बनाया गया था।
यहां डीएम, एडीएम दफ्तर के साथ अन्य जिला स्तरीय कार्यालय चलते थे। जिला मुख्यालय बनने के बाद कलक्ट्रेट समेत कई कार्यालय ककोर चले गए, लेकिन आबकारी, खाद्य आपूर्ति और खंड शिक्षा कार्यालय अभी भी यही हैं।
इस बीच बसपा सरकार में शहर में कांशीराम कॉलोनियां बनवाई गई थीं। इसमें 500 से ज्यादा आवासों में करीब दो हजार से ज्यादा लोग निवास करते हैं। इस कॉलोनी में जलनिकासी के लिए छोटी-छोटी नालियां और पतली सड़कों का निर्माण कराया गया था।
कॉलोनी के जलनिकासी के लिए गौरैया तालाब की तरफ नाला भी बनवाया गया था। मगर नालों की नियमित सफाई न होने से जलनिकासी ठप है। इससे बरसात के अलावा आम दिनों में भी जलभराव रहता है।
हालत यह है कि जगह-जगह सड़कें टूट गईं हैं। सीवर के मेनहोल खुले हैं। खाली प्लाटों में गंदा पानी भरा है। सफाई के अभाव में गंदगी के ढेरों से बदबू उठ रही है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है।
यहां पर दो परिषदीय स्कूल बने हैं, लेकिन वहां तक आवागमन के लिए सड़कें दुरुस्त नहीं है। मार्गों पर जलभराव रहता है। स्थानीय लोगों रामबाबू, सुरेश, गोविंद, पप्पू, सोनू, आयुष आदि ने बताया कि यहां सफाई कर्मचारी खानापूर्ति कर चले जाते हैं।
डीएसओ राजेश कुमार ने बताया कि दफ्तर के आसपास गंदगी रहने पर जाली लगवाई गई है। खाली जगह पर अक्सर बारिश का पानी भर जाता है। पिछले दिनों यहां मलबा डलवाया गया था, लेकिन वह भी अधूरा पड़ा है।
डीएसओ ऑफिस के सामने जलभराव की किसी ने सूचना नहीं दी और न ही विभाग ने कोई पत्र लिखा है। पत्र मिलेगा तो समस्या से निजात दिलाने का प्रयास किया जाएगा। कांशीराम कॉलोनी की टूटी नालियां व सड़कों का निर्माण बजट आने पर होगा। वहां कर्मचारी सफाई कार्य कर रहे हैं। उन्हें गंदगी साफ करने को कहा गया है। - अनूप गुप्ता, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद।