फोटो-01एयूआरपी- 25 कथा सुनाते व्यास व नीचे श्रीकृष्ण और राधा की वेष में युवक-युवती। संवाद
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अछल्दा। हनुमंतपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला के वर्णन के साथ माखन चोरी और मटकी फोड़ का आयोजन हुआ। कथा में सुनाया कि भारी बारिश से ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्द्धन पर्वत उठाया था।
कथा व्यास राजीव शास्त्री ने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म होने के बाद कंस ने उनको मारने के लिए राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षसिनी पूतना को भेजा था। पूतना वेष बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन श्रीकृष्ण पूतना को मौत के घाट उतार देते है।
श्रीकृष्ण को मारने के सारे प्रयास कंस के असफल हो जाते है और धीरे-धीरे वे सभी राक्षसों को मार देते हैं। कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन के कार्यक्रम की तैयारी करते हैं। भगवान कृष्ण इंद्रदेव का पूजन करने से अच्छा गोवर्द्धन पर्वत के पूजन की बात करते है। इंद्र यह सुनकर क्रोधित हो जाते हैं और भारी वर्षा करते हैं।
यह देखकर ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। तब श्रीकृष्ण ने गोवर्द्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे ब्रजवासियों को पर्वत को नीचे बुला लिया था। इंद्र देव ने हारकर एक सप्ताह के बाद बारिश बंद कर दिया था। कथा के साथ ही बाल सखाओं ने माखन चोरी कर मटकी भी फोड़ी। माखन चोर कथा सुनकर श्रोता सराबोर हुए। इस दौरान विनय यादव, अरविंद, यादव, अंशु सोनी, शिवम यादव व राजवीर यादव समेत आदि भक्त मौजूद रहें।