औरैया। सरकारी एंबुलेंस 102-108 की सेवा देने के नाम पर मरीज को लाने और ले जाने के नाम पर चक्कर बढ़ाने के मामले पूरे प्रदेश में सामने आए हैं। इसको लेकर सेवा प्रदाता कंपनी शक के दायरे में है। मामले में गंभीरता बरतते हुए महानिदेशक परिवार कल्याण ने जांच के आदेश दिए हैं। जिले में अपर निदेशक स्तर से गठित टीम में सीएमओ तीन माह का रिकार्ड जांचेंगी। इसकी जानकारी मिलने पर एंबुलेंस चालकों में हड़कंप मचा है।
महानिदेशक परिवार कल्याण ने मनमाने ढंग से 102 व 108 एंबुलेंस के फेरे बढ़ाए जाने की जांच का आदेश जारी किया है। जिसमें हवाला दिया गया है कि शासन स्तर पर शिकायतें मिल रही हैं कि जिलों में चल रहीं एंबुलेंसों में फर्जी तरीके से मरीज दर्शा कर अस्पतालों में लाने ले जाने के चक्कर बढ़ाए जा रहे हैं। इसका लाभ सेवा प्रदाता कंपनी को मिल रहा है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो ऐसा करने के लिए एंबुलेंस के पायलट व ईएमटी पर दबाव बनाया गया। बात न मानने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। कुछ जिलों में ऐसा किया भी गया है। कंपनी के इस कृत्य का विरोध करने पर जिले में कुछ लोगों को बर्खास्त कर दिया गया। जबकि कोरोना काल में एंबुलेंस कर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए पीड़ितों को उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया।
कुछ कर्मचारियों की शिकायत पर मामला संज्ञान में आया तो शासन ने पिछले तीन माह के रिकार्ड की जांच के निर्देश दिए हैं। सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 102, 108 की मिलाकर करीब 40 एंबुलेंस सेवाएं दे रही हैं। शासन स्तर पर एंबुलेंस में फर्जी तरीके से फेरे बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। इस पर एडी से गठित टीम जांच करेगी। मुझे भी जीपीएस डाटा के साथ रैंडम जांच करनी है। इसके लिए कार्रवाई शुरू की गई है।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
नियम के विरुद्ध व मनमाने तरीके से फर्जी आधार और मोबाइल नंबर दर्शाने के बाद एंबुलेंस के फेरे बढ़ाने की जांच महानिदेशक परिवार कल्याण स्तर से जारी पत्र में जांच की जिम्मेदारी एडी हेल्थ को सौंपी है। एडी के नेतृत्व में जिलों में टीम गठित की जाएगी। फरवरी से अप्रैल तक एंबुलेंस से आने-जाने वाले मरीजों की जांच करनी है। तीन माह में सेवा प्रदाता कंपनी को हुए भुगतान और वास्तविक मरीजों की संख्या, पीसीआर में अंकित आधार कार्ड नंबर व मोबाइल नंबर का मिलान करना होगा। एक सप्ताह में ही जांच पूरी कर निर्धारित प्रोफार्मा पर रिपोर्ट शासन को भेजना होगा।