औरैया। डॉक्टर की आत्महत्या के बाद कोतवाली पुलिस की कार्यशैली और भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब पुलिस महकमे पर लगे दाग को मिटाने के लिए देर रात से लेकर सुबह तक बैकडोर से डैमेज कंट्रोल का खेल खेला गया।
सूत्रों के अनुसार, जो परिजन देर रात तक पुलिस पर आरोप लगा रहे थे, सुबह होते-होते वह पलट गए। चर्चा है कि पुलिस पीड़ित परिवार का दर्द साझा करने और उन्हें न्याय दिलाने से ज्यादा, एसएचओ पर लगे दाग को किसी भी तरह साफ करने में जुटी रही। कहा जा रहा है कि पुलिस अपने मैनेजमेंट के दम पर परिजन को शांत करने में तो किसी तरह सफल रही, लेकिन सबसे बड़ा पेंच मृतक के आखिरी वीडियो पर फंसा हुआ है। डॉक्टर ने आत्महत्या से ठीक पहले फेसबुक पर लाइव आकर जो गंभीर आरोप लगाए थे, वो अब सोशल मीडिया पर अभी भी हैं। लोग अब पुलिसिया तफ्तीश पर ही सवाल उठा रहे हैं कि परिजन भले पुलिस के सहयोग बात कर रही हो, लेकिन फेसबुक लाइव में खुद मृतक ने जो सच बयां किया है, उसे खाकी कैसे और किस तरह खत्म कर पाएगी। फिलहाल, इस पूरे मामले ने एसएचओ की साख को कटघरे में खड़ा कर दिया है और जनता के बीच पुलिसिया डैमेज कंट्रोल की यह रणनीति चर्चा का विषय बनी हुई है।