औरैया। हाईवे से सटा जैतापुर-जनेतपुर मार्ग इन दिनों जर्जर है। शिकायत के बाद भी इस जर्जर सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है।
बरसात में यह सड़क तालाब बन जाती है। ऐसे में इस रास्ते पर पैदल चलना तक दूभर हो जाता है। जबकि इस रास्ते से 22 गांवों के हजारों लोग निकलते हैं।
जनेतपुर-जैतापुर गांव शहर से बमुश्किल तीन किमी. की दूरी पर स्थित है। यहां सिंचाई विभाग के डाक बंगले समेत जिले के 12 व कानपुर देहात के 10 गांवों (कुल 22 गांव) को जोड़ने के लिए नेशनल हाईवे से संपर्क मार्ग का निर्माण हुआ था। कई दशक तक यह खड़ंजा मार्ग रहा, लेकिन हाईवे निर्माण के बाद इसका डामरीकरण कर दिया गया।
इस मार्ग से जनेतपुर-जैतापुर गांवों के अलावा मिर्जापुर, भरसेन, सुरान, राहतपुर, भड़ारीपुर, कूम्हापुर, लुहियापुर, पातेपुर, शहबदिया तथा कानपुर देहात के चमरौआ, कसोलर, धरमपुर, सुंदरीपुर, रायपुर, नैपलापुर, अस्तापुर, सधवापुर आदि गांवों के लोग आवागमन करते हैं।
वहीं, पिछले कई सालों से यह सड़क उखड़ी पड़ी है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे है। इस पर पैदल चलना तक दुश्वार हो गया है। बरसात में यह पूरी तरह तालाब में तब्दील हो चुकी है। इस सड़क की मरम्मत के लिए जैतापुर के प्रधान अभिषेक यादव ने 28 सितंबर 2024 को मुख्यमंत्री जन सुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत की थी।
इस पर लखनऊ से लोक निर्माण विभाग ने समस्या का समाधान करते हुए पैचवर्क कराने का निर्देश दिया था। प्रधान ने बताया कि इसके बावजूद इस मार्ग पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अब यहां से निकलना तक दूभर हो गया है। उन्होंने अब डीएम को सीएम पोर्टल के निर्देश की प्रति संलग्न कर एक पत्र भेजा है और जल्द सड़क की मरम्मत की मांग की है।