बिधूना (औरैया)। गरीबी मुक्त गांव बनाने के लिए जिम्मेदार गरीबी तो खत्म नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन कागजों में गरीबों को ही खत्म कर दे रहे हैं। विकास खंड बिधूना की ग्राम पंचायत असजना में भी ऐसा ही हुआ है।
गांव गरीबी मुक्त घोषित हो गया जबकि यहां सैकड़ों परिवार आज भी गरीब हैं, उनके पास अपना घर तक नहीं है। पांच हजार के करीब आबादी वाली ग्राम पंचायत असजना में 88 परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसा हम नहीं बल्कि पूर्ति विभाग के आंकड़े कह रहे हैं। इन परिवारों के पास अंत्योदय राशन कार्ड है। इसके अलावा बात जब आवास की आती है तो भी गरीबी मुक्त गांव की परिकल्पना साकार होती नजर नहीं आती है।
इसी साल ग्राम प्रधान उमा देवी ने सर्वे के बाद 63 पात्रों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभान्वित किए जाने की मांग की है। इनका सर्वे भी हो चुका है, यह परिवार ऐसे हैं, जिनके पास सिर छिपाने के लिए छत नहीं है। कोई झोपड़ी तो कहीं कोई जर्जर कच्चे मकान में रह रहा है।
अगर रोजगार की बात करें तो 400 के करीब यहां मनरेगा मजदूर हैं, जिनकी कमाई केवल मनरेगा से मिलने वाली मजदूरी ही है। इसी से वह अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। इन सब के बावजूद झूठे आंकड़ों से गांव को गरीबी मुक्त घोषित कर दिया गया। (संवाद)
ग्राम प्रधान को नहीं पता कब हुआ सर्वे
ग्राम प्रधान उमा देवी का कहना है कि कब उनके गांव को गरीबी मुक्त घोषित कर दिया गया, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने तो खुद जीरो पावर्टी सर्वे में 23 लोगों के नाम भेज थे। साथ ही आवास विहीन सर्वे में भी 63 परिवार सामने आए थे।
टिनशेड में रह रहीं
केस एक: ग्राम पंचायत असजना के गांव पुराव बड़े निवासी नीरज अपने पति मलिखान के साथ टिनशेड में रह रहीं हैं। सालों से वह आवास की मांग करती आ रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें आवास नहीं मिल सका। राशन के लिए भी वे सरकार पर ही निर्भर हैं।
झोपड़ी में निवास
केस दो: ग्राम पंचायत असजना की रहने वाली सरोजनी देवी के परिवार में छह सदस्य हैं। बीते 15 सालों से वे पूरे परिवार के साथ झोपड़ी में निवास कर रहीं हैं, लेकिन उन्हें भी प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का लाभ नहीं मिल सका।
कच्चे मकान में रहते
केस तीन: ग्राम पंचायत असजना के गांव पुर्वा बड़े निवासी रामचंद्र तीन दशक से अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहते हैं। अब यह मकान जर्जर हो चुका है। कई बार आवास दिलाने की मांग की गई, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।
फोटो-10-सरोजनी देवी का परिवार बीते 15 सालों से इसी झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर है। संवाद- फोटो : udhampur news
फोटो-10-सरोजनी देवी का परिवार बीते 15 सालों से इसी झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर है। संवाद- फोटो : udhampur news