औरैया। एआरटीओ कार्यालय में गत दिनों जिलाधिकारी व एसपी ने छापेमारी की थी। जहां मौके से पांच दलालों को गिरफ्तार किया था। ऐसे में अब एआरटीओ कार्यालय में लाइसेंस बनने की गति बहुत ही धीमी हो गई है। पहले जहां प्रतिदिन 50-60 लाइसेंस बन जाते थे। दलालों के खत्म होते ही महज 10 से 12 तक ही रह गए हैं।
एआरटीओ कार्यालय में दलालों के हस्तक्षेप को समझना है तो पिछले दिनों हुई छापेमारी से पहले और अब बनने वाले ड्राइविंग लाइसेंसों की संख्या से समझा जा सकता है। छापेमारी से पहले ककोर स्थित एआरटीओ कार्यालय में रोजाना 50-60 ड्राइविंग लाइसेंस बनते थे। इस व्यवस्था के तहत आनलाइन आवेदन करना होता है। ऑनलाइन फीस भी जमा हो जाती है। महज वाहन चलाने की गतिविधि को लेकर लाइसेंस आवेदकों को एआरटीओ कार्यालय आना होता है।
डीएम व एसपी की छापेमारी के बाद से यहां दलालों का टोटा हो गया है। ऐसे में सुविधाजनक माध्यम से आसानी से बन जाने वाले लाइसेंस की व्यवस्था कहीं न कहीं चरमराई है। चर्चा यह है कि लोग सीधे जाने में कतरा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर नियम संगत कवायद से गुजरने से भी कतरा रहे हैं। वहीं कुछ कहा कहना है कि कार्यालय के बाहर ऑनलाइन आवेदन कराने वाले लोगों की दुकानें भी सीज कर दी गई है। ऐसे में आने वाले लोगों के आवेदन करने का संकट है। लेकिन आवेदक अपना आवेदन किसी भी जनसेवा केंद्र से करा सकते हैं।
वर्जन
‘लाइसेंस के लिए स्लॉट तय होता है। जितने लोग आवेदन करेंगें, उतने लोग आते हैं। इन दिनों लाइसेंस बनवाने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है। इसके लिए बुनियादी बिंदुओं पर काम किया जा रहा है। लोगों में विश्वास दिलाया जा रहा है। स्वयं व जनसेवा केंद्र से आवेदन कराएं। कार्यालय आकर स्वयं काम कराएं।’
-स्वदेश कुमार, एआरटीओ