17 से 29 फरवरी तक घर-घर खोजे जाएंगे क्षयरोगी, डेढ़ लाख आबादी के स्वास्थ्य की होगी स्क्रीनिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2025 तक भारत को टीबी रोग से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ जिला क्षय रोग विभाग एक बार फिर सघन टीबी रोगी खोज अभियान शुरू कर रहा है। यह अभियान 17 से 29 फरवरी तक चलेगा। अभियान के दौरान एक लाख 50 हजार लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। कुल 60 गठित टीमें घर-घर जाकर टीबी के मरीजों को खोज कर उनका बलगम लेकर जाँच के लिए स्वास्थ्य केंद्र पर देंगी और टीबी की पुष्टि होने पर उस मरीज का तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा।
क्षय रोग पूरे विश्व के लिए एक जटिल समस्या बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार विश्व के कुल टीबी मरीजों का 27 प्रतिशत भारत में हैं, जोकि विश्व में प्रथम स्थान पर है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. नवीन कुमार मिश्रा ने बताया कि यह सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान का दूसरा चरण है। इसमें जनपद की कुल आबादी (लगभग 14.9 लाख) की 10 फीसदी की स्क्रीनिंग की जाएगी। जिसके लिए अधिकतम टीबी रोगी मिलने वाले संभावित स्थानों को चिन्हित किया गया है।
इस अभियान का आरंभ जनपद औरैया में 17 फरवरी सोमवार से होगा। डॉ. मिश्रा ने बताया कि टीबी का एक मरीज 10 से 15 लोगों को संक्रमित कर देता है। इसलिए जल्दी पहचान होने के बाद तत्काल उपचार शुरू होना जरूरी है। उन्होंने बताया की टीबी के लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक खांसी, दो सप्ताह तक बुखार, वजन का घटना, भूख न लगना, बलगम में खून आना आदि हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग टीबी की गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं वह अपना पूरा उपचार कराएं।
रोजाना 50-60 घरों में जाएगी एक टीम
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि तीन सदस्यीय टीम 50 से 60 घरों का भ्रमण कर संभावित मरीजों के बलगम के नमूने इकट्ठा करेगी। टीबी रोग पाए जाने पर तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा। कुल 12 सुपरवाइजर एवं सेक्टर चिकित्साधिकारी इस अभियान में कार्य करेंगे। टीबी के लक्षण होने पर टीम बलगम का सैंपल लेगी और उसकी जांच भी कराएगी। घर के किसी भी सदस्य को उक्त में से कोई भी लक्षण है तो टीम के सदस्यों को स्वास्थ्य की जानकारी अवश्य दें।