औरैया। टोल टैक्स में 8 से 10 फीसदी की वृद्धि से ट्रांसपोर्टरों और ट्रक मालिकों में खलबली मची है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि दो साल से वह लोग कारोबार को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। लॉकडाउन में धंधा मंदा पड़ा। अब टोल टैक्स का बोझ डाला जा रहा है। सरकार उन्हें लगातार तोड़ने का काम कर रही है। सरकार उनके हितों को देखते हुए टोल टैक्स न बढ़ाकर टोल परमिट उन्हें जारी करे। जिससे ट्रांसपोर्टरों और ट्रक मालिकों को राहत मिलेगी। तो वहीं सरकार के राजस्व में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी।
केंद्र सरकार ने टोल टैक्स के नियमों एक बार फिर बदलाव किया है। हालांकि हुए बदलाव को अभी टोल प्लाजाओं पर लागू नहीं किया गया है। नए टैक्स के तहत ट्रक मालिकों को टोल टैक्स अब आठ से 10 फीसद तक अधिक देना पड़ा। इस खबर से ट्रांसपोर्टरों और ट्रक मालिकों में हड़कंप की स्थिती देखने को मिल रही है। रविवार को शहर के ट्रांसपोर्टरों और ट्रक मालिकों ने बताया कि सरकार अपने राजस्व में बढ़ोत्तरी के लिए उनका भी ख्याल रखे तो बेहतर होगा। नहीं तो उन्हें इस कारोबार से मुक्ति पाना ही एक रास्ता नजर आ रहा है। बताया कि सरकार टोल परमिट जारी कर उन्हें राहत दे सकती और अपने राजस्व में बढ़ोत्तरी कर सकती है।
बिल्लू गुप्ता ने बताया कि अधिकांश सड़कों की हालत खराब है। जिनमें सुधार नहीं हो रहा है। इन जर्जर मार्गों पर दौड़ रहे ट्रकों को नुकसान हो रहा है। ऐसे में सरकार भी टोल टैक्स बढ़ा रही है। सरकार को चाहिए कि ट्रांसपोर्टरों की हालत को देखकर काम करे।
ट्रक मालिक विशाल शुक्ला ने बताया कि लाकडाउन के चलते कई ट्रक मालिकों का कारोबार थम सा गया है। ऐसे में कुछ ट्रक मालिकों ने अपने ट्रकों को खड़ा कर दिया है। सरकार सभी वर्गों के हित में काम कर रही है।
बडे़ यादव ने बताया कि इन दिनों ट्रांसपोर्ट कारोबार बंदी की कगार पर जा पहुंचा है। नुकसान झेलने वाले ट्रक मालिकों को सरकार राहत प्रदान करे। सरकार ट्रांसपोर्टरों पर मरहम लगाने के बजाय नमक छिड़क रही है।