बिधूना (औरैया)। यूक्रेन से सुरक्षित घर पहुंचे असजना निवासी शिवप्रताप सिंह को देखकर परिजनों के चेहरे खिल गए। परिजनों के साथ ग्रामीणों ने शिवप्रताप का स्वागत किया।
यूक्रेन के डेनिप्रो शहर से एमबीबीएस कर रहा शिवप्रताप शनिवार की रात करीब एक बजे घर पहुंचा। रविवार सुबह परिजनों और ग्रामीणों से मिलने के बाद यूक्रेन के हालात बताए। बताया कि भीषण बमबारी और गोलीबारी के बीच छह दिन यूक्रेन में दहशत में बीते। वहां के हालात याद कर रूह कांप जाती है। यूक्रेन में बिताए दिनों की हकीकत बयान करते-करते शिवप्रताप दादी से लिपट कर रोने लगा। बताया कि रूस-यूक्रेन जंग के दौरान बम धमाकों से छात्र दहशत में आ गए थे और हॉस्टल के बंकर में शरण लिए थे। 27 फरवरी को वह छात्रों के साथ रेलवे स्टेशन पहुंचा, लेकिन यूक्रेनियों के अलावा किसी को ट्रेन में नहीं चढ़ने दिया जा रहा था। इस बीच कुछ दूरी पर धमाका हुआ, जिससे सभी भयभीत हो गए।
लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलकर फिर से हॉस्टल में आ गए। बताया कि हम लोगों के पास पैसे भी खत्म हो रहे थे। एटीएम में भी पैसे नहीं थे। बाजार खुल नहीं रहा था, जिस कारण खाने की वस्तुओं की भी कमी थी। एक ओर भूख से परेशान थे तो वहीं दूसरी ओर बमों के धमाकों से दिल दहल रहा था। बाबा रघुवीर सिंह चौहान, दादी बिटान देवी, पिता ब्रजपाल सिंह, माता निर्मला देवी, चाचा ब्रजमोहन सिंह, चाची गीता देवी आदि ने खुशी का इजहार करते हुए भारत सरकार को धन्यवाद दिया।
रूम पार्टनर के बेहोश होने पर हो गया था चिंतित
शिवप्रताप ने बताया कि 29 फरवरी की देर शाम वह लोग यूक्रेन-रोमानिया बार्डर पर पहुंचे। भयंकर सर्दी के दौरान बार्डर पर दो घंटे लाइन में खड़े रहने से रूम पार्टनर चित्रांश अचानक बेहोश हो गया। रोमानिया के चिकित्सकों ने तुरंत उपचार किया तब जाकर सुकून मिला। दो दिन रोमानिया के शेल्टर होम में रुकने के बाद सभी लोग शुक्रवार की रात लगभग आठ बजे एयरपोर्ट पहुंचे। रात 10 बजे फ्लाइट सभी को लेकर दिल्ली रवाना हो गई।
फोटो06एयूआरपी 28- दादा-दादी व परिवार के सदस्यों के साथ बैठा शिव प्रताप सिंह उर्फ राजन। संवाद- फोटो : AURAIYA