शहर की आबादी अतिक्रमण की मार झेलने को मजबूर है। अतिक्रमण के कारण सड़कों पर हादसे व झगड़े आम हो गए है। फुटपाथों तक लगे बेतरतीब टेलीफोन, बिजली के पोल जहां पटरी दुकानदारों के लिए अतिक्रमण का सहारा बने हैं वहीं बड़े दुकानदारों ने फुटपाथ पर कब्जा कर गलियों को संकरा कर दिया है।
ऐसे तंग रास्तों से होकर गुजरना हर किसी के लिए आसान नहीं है। मंगलवार को अमर उजाला ने शहर की टोह ली तो अतिक्रमण के संक्रमण से पूरे शहर के संक्रमित दिखाई दिया। शहर में अतिक्रमण के हालातों को बयां करती अमर उजाला की खास खबर ...
शहर की सबसे व्यस्ततम इटावा रोड अतिक्रमण से लगातार संकरी होती जा रही है। कागजों में 40 फुट चौड़ी यह मुख्य सड़क किसी बस्ती के संपर्क मार्ग जैसी हो गई है। अस्पताल की बाउंड्री वॉल के सहारे स्थाई/अस्थाई अतिक्रमण नए आने आने वाले रोगियों और उनके तीमारदारों को जिला अस्पताल की पहचान कराने में नाकाम साबित हो रही है।
इस प्रमुख मार्ग पर अतिक्रमणकारियों में स्वयं नगर पालिका का नाम भी शामिल है। यहां पालिका प्रशासन के निर्माण में लगने वाले पाइप लाइन व सड़कों तक फैली निर्माण सामग्री अतिक्रमण कारियों की हौसला आफजाई करती नजर आती है।
ईओ, नगर पालिका परिषद आर के शर्मा ने कहा कि कोई खास बात नहीं है, अभियान बस ऐसे ही नहीं चल पाया है। आगे सोचेंगे।
सीओ, सदर रमेश चंद्र भारतीय ने कहा कि शहर में अतिक्रमण अभियान को लेकर व्यापारियों की बैठक में चर्चा हुई है। इस अभियान को कितने चरणों में कब चलाया जाए । इस पर सहमति बनाना मुश्किल है।