दिबियापुर (औरैया)। वैसुंधरा में फर्जी अभिलेख तैयार कर करीब 200 करोड़ की 48 एकड़ जमीन हड़पने के मामले में 55 आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज होने से हड़कंप मच गया है।
जांच कर रही पुलिस ने क्षेत्रीय लेखपाल से फर्जीवाड़े के मामले में अभिलेख मांगे हैं। इस मामले की विवेचना एनटीपीसी चौकी इंचार्ज सुरेंद्र सिंह को सौंपी गई है। वैसुंधरा में एसडीएम कोर्ट के आदेश पर जमीन को ग्रामसभा में दर्ज करा दिया गया है।
वहीं डीएम के आदेश पर क्षेत्रीय लेखपाल अभिनय ने करोड़ों की जमीन हड़पने के मामले में गुरुवार को 55 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
मामला साल 1987-88 से जुड़ा है। तब वैसुंधरा में चकबंदी में 50 से अधिक लोगों ने जालसाजी कर करीब 48 एकड़ जमीन हथिया ली थी। यह जमीन अलग-अलग गाटा संख्या में है। फर्जी प्रविष्टियों के सहारे लोगों ने जमीन अपने-अपने नाम करवा ली थी।
सालों तक यह मामला दबा रहा था। पिछले साल पहले अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद यह सुर्खियों में आया था। डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने 31 जुलाई 2024 को जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने जांच कमेटी गठित करके रिपोर्ट मांगी थी। प्रभारी निरीक्षक रुद्र प्रताप नारायण त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करेगी।
विवेचक एनटीपीसी चौकी इंचार्ज सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट दर्ज कराने वाले लेखपाल से अभिलेख मांगे गए हैं। पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। जांच में यदि और नाम प्रकाश में आए तो उनको भी शामिल किया जाएगा।
जमीन का फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। सरकारी जमीन हथियाकर पाता पेट्रो केमिकल्स को बेचकर मोटी रकम सीधी करने वालों से रिकवरी की जाएगी। इसकी प्रक्रिया चल रही है।
-डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, डीएम