एरवाकटरा। क्षेत्र के दोबामाफी गांव में स्थित ऋषि दुर्वासा की समाधि पर लगने वाला मेला बृहस्पतिवार को अगहन की पूर्णिमा से शुरू होकर पूस माह की पूर्णिमा तक चलेगा। इसकी तैयारियां पूरी हो गई हैं।
बुधवार को कई दुकानदार अपनी दुकानों को सजाते दिखे। मेले में महिलाएं पहुंचने लगी हैं। दोबा मेला आज भी अपनी रंगत बनाए हुए है। यहां न केवल जनपद बल्कि अन्य प्रदेशों के लोग भी पूर्णमासी के दिन अपने नवजात बच्चों को लेकर आते हैं और उनका मुंडन संस्कार कराते हैं। दोबा मेले का इंतजार क्षेत्रीय लोगों को वर्ष भर रहता है। यह मेला स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराता है।
मेले में स्थानीय लोग उन्नत नस्ल के मवेशी, लकड़ी के सामान, मिट्टी के बर्तन, पत्थर की चक्की व सिलबट्टे, ऊनी कपड़े सहित अन्य जरूरी सामान की खरीदारी करते हैं। वहीं, युवा आसमानी झूला, ब्रेकडांस झूला, ड्रैगन झूला व बच्चे टॉय ट्रेन, घोड़ा झूला, मिक्की माउस आदि झूलों का जमकर आनंद लेते हैं।
मेले में मिठाई की दुकान चलाने वाले विशुनगढ़ के अमित, इटावा के गरम कपड़े के दुकानदार हसन खां, एरवाकटरा के चश्मा, बेल्ट, पर्स आदि के दुकानदार आर्यन, करहल निवासी खिलौना दुकानदार आशिफ आदि पहुंचे। मैनपुरी के चन्ने कहते हैं कि इस बार मेले के समय मौसम सही है, सर्दी कम पड़ रही है, इसलिए मेले में भीड़भाड़ अधिक रहने और अच्छी दुकानदारी होने की उम्मीद है ।
फोटो-15-दुर्वासा ऋषि धाम पर लगी महिलाओं की भीड़। संवाद