प्रत्याशियों के वोट अभी मतपेटियों में बंद हैं। जीत-हार का फैसला 13 दिसंबर को होना है। लेकिन प्रत्याशियों में जीत को लेकर बेचैनी बढ़ती जा रही है। अपनी जीत के लिए प्रत्याशी टोना-टोटका से लेकर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करा रहे हैं। वहीं गांव की चौपालों में सिर्फ चुनाव की ही चर्चा चल रही है।
छोटी संसद की चाभी पाने के लिए प्रत्याशी हर जतन करने में जुटे हैं। इन दिनों प्रत्याशी की दिनचर्या भी बदली-बदली सी नजर आ रही है। कभी मंदिर में माथा न टेकने वाले प्रत्याशी भी रोजाना मंदिर की चौखट पर माथा टेक रहे हैं। तो वहीं दरगाहों व मस्जिदों में भी जीत की मुरादें मांगने वालों की संख्या कम नहीं है।
मुरादगंज में तो एक प्रत्याशी ने पुरोहितों से दुर्गा सप्तसती का पाठ भी कराना शुरू कर दिया है। घर से निकलने के बाद रास्ते में मिलने वाले हर धार्मिक स्थल के सामने माथा टेकने से पीछे नहीं हटते है। क्षेत्र के भालेश्वर मंदिर, पंचनद स्थित कालेश्वर मंदिर, कर्णा देवी मंदिर, सिकरोड़ी स्थित रामजानकी मंदिर, हैदरपुर महामाई मंदिर, निगड़ा के गमा देवी मंदिर आदि में माथा टेक रहे है। सभी को उम्मीद है कि मतपेटिकाओं में बंद मतों से उनकी किस्मत अवश्य चमकेगी, जीत का सेहरा उनके सिर पर होगा।